
नई दिल्ली, 28 जुलाई। भारत के digital भुगतान क्षेत्र ने पिछले छह वित्तीय वर्षों में 65,000 करोड़ से अधिक लेनदेन देखे हैं, जिनकी कुल राशि 12,000 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यह जानकारी सोमवार को संसद में साझा की गई।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों सहित देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI), फिनटेक कंपनियों, बैंकों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है।
चौधरी ने कहा कि RBI ने 2021 में पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (PIDF) की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य टियर-3 से टियर-6 शहरों, पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर में डिजिटल भुगतान सुविधाओं को बढ़ाना है। 31 मई 2025 तक PIDF के माध्यम से लगभग 4.77 करोड़ डिजिटल टच पॉइंट्स स्थापित किए जा चुके हैं।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में चौधरी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2024 25 में MSMEs के लिए नई डिजिटल क्रेडिट असेसमेंट मॉडल की घोषणा की गई थी। इस मॉडल के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) MSMEs को क्रेडिट देने के लिए बाहरी मूल्यांकन पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्वयं की क्षमता विकसित करेंगे। यह मॉडल अर्थव्यवस्था में MSMEs के डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर क्रेडिट असेसमेंट करेगा।
6 मार्च 2025 को केंद्रीय वित्त मंत्री ने MSMEs के लिए इस नए क्रेडिट असेसमेंट मॉडल को लॉन्च किया। यह मॉडल डिजिटल रूप से प्राप्त और सत्यापित डेटा का उपयोग करता है और सभी लोन एप्लिकेशन्स के लिए ऑब्जेक्टिव डिसीजनिंग के आधार पर MSME ऋण मूल्यांकन के स्वचालित प्रोसेस को सक्षम बनाता है।
इस मॉडल द्वारा उपयोग किए जाने वाले डिजिटल फुटप्रिंट्स में NSDL के माध्यम से PAN ऑथेंटिकेशन, OTP के जरिए मोबाइल और ईमेल वेरिफिकेशन, API, सर्विस प्रोवाइडर्स के माध्यम से GST डेटा प्राप्त करना, अकाउंट एग्रीगेटर का उपयोग कर बैंक स्टेटमेंट एनालिसिस, ITR अपलोड और वेरिफिकेशन, और क्रेडिट इनफॉर्मेशन कंपनियों (CICs) के माध्यम से ड्यू डिलिजेंस शामिल हैं।
चौधरी ने बताया कि यह मॉडल अलग अलग लोन अमाउंट थ्रेशोल्ड के साथ सभी बैंकों में लागू है। 1 अप्रैल से 15 जुलाई 2025 के बीच PSBs ने नए क्रेडिट असेसमेंट मॉडल के तहत 98,995 MSME लोन एप्लिकेशन मंजूर किए हैं।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि मार्च 2025 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 668.3 अरब डॉलर पर था, जो लगभग 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है और बकाया बाह्य ऋण का 90.8 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। अल्पकालिक ऋण का अनुपात रिजर्व के मुकाबले 20.1 प्रतिशत है और 11 जुलाई 2025 तक विदेशी मुद्रा भंडार 696.7 अरब डॉलर है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए RBI ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें कॉर्पोरेट डेट में FPI के लिए निवेश सीमा हटाना, भारत में व्यापारिक हित वाले गैर निवासियों के लिए विशेष NRE खाते शुरू करना और FCNR(B) जमा पर ब्याज दरें बढ़ाना शामिल है। विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षा, तरलता और रिटर्न के उद्देश्य से निवेशित किया जाता है।
एक अन्य प्रश्न के जवाब में चौधरी ने कहा कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने सभी शनिवार को बैंकिंग अवकाश घोषित करने का प्रस्ताव दिया है। 10वें द्विपक्षीय समझौते और IBA तथा कर्मचारी संघों के बीच 7वें संयुक्त नोट के बाद सरकार ने 28 अगस्त 2025 की अधिसूचना जारी कर हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकिंग अवकाश घोषित किया है।
PSBs में मैनपावर की आवश्यकता का निर्धारण संबंधित बैंक अपनी जरूरतों के आधार पर करते हैं। 31 मार्च 2025 तक PSBs के 96 प्रतिशत स्टाफ अपने व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार तैनात हैं। छोटे अंतर का कारण सेवानिवृत्ति और अन्य कारणों से होने वाला अट्रिशन है।