उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का दौरा किया। उनका यह दौरा राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के अंतर्गत चल रहे संरक्षण कार्य का निरीक्षण करने के लिए था। यह मुख्यमंत्री का विश्वविद्यालय परिसर का तीसरा दौरा था, जहाँ उनका पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया। छात्रों ने वैदिक मंत्रों और श्लोकों का पाठ कर उनका अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण कार्य की प्रगति पर करीब से नज़र रखी और काम की गति को तेज़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन पांडुलिपियों का संरक्षण, जो भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, एक सराहनीय कार्य है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सुरक्षा हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के विस्तार भवन में भारत सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने ऐतिहासिक सरस्वती भवन पुस्तकालय और अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति के बारे में भी जानकारी ली।
कुलपति बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री का विश्वविद्यालय में यह तीसरा दौरा संस्कृत भाषा, विश्वविद्यालय और देववाणी के लिए गौरव और खुशी की बात है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय पांडुलिपियों के संरक्षण के अभियान को गति देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार राकेश कुमार, वित्त अधिकारी हरिशंकर मिश्रा, जितेंद्र कुमार, महेंद्र पांडे, दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. राजनाथ, इंजीनियर रामविजय सिंह, जनसंपर्क अधिकारी शशिंद्र मिश्रा के साथ विश्वविद्यालय परिवार के अन्य प्रोफेसर और अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री द्वारा दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए की गई यह पहल भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह सुनिश्चित करेगा कि हमारी प्राचीन ज्ञान और धरोहरें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसकी सराहना पूरे देश में की जाएगी, और इससे अन्य राज्यों को भी अपनी धरोहरों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलेगी।
संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि सरकार उसे पूरा समर्थन दे रही है ताकि पांडुलिपियों का संरक्षण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सके। यह न केवल प्राचीन ग्रंथों को सुरक्षित रखेगा, बल्कि शोधकर्ताओं के लिए भी नए रास्ते खोलेगा। मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करता है कि इस महत्वपूर्ण कार्य में कोई कमी न रहे।
इस दौरे से पहले, 29 अगस्त को, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी। उन्होंने कहा था कि हर खिलाड़ी अपने आप में समाज का एक नायक होता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि हर नागरिक को एक खिलाड़ी की भावना, राष्ट्र के प्रति समर्पण, अनुशासन, समन्वय और जीवन में उत्कृष्टता की खोज को अपनाना चाहिए। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के 88 पदक विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि से सम्मानित किया और नवनियुक्त सहायक खेल प्रशिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इन दोनों आयोजनों से योगी सरकार की संस्कृति, खेल और शिक्षा के प्रति गंभीरता स्पष्ट होती है।
ये प्रयास सिर्फ़ अतीत को बचाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य को भी आकार देंगे। दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण हमें हमारी जड़ों से जोड़े रखेगा, जबकि खिलाड़ियों का सम्मान और उन्हें प्रोत्साहन देने से स्वस्थ और प्रतिस्पर्धी समाज का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण एक समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।