
भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, खासकर passenger vehicle सेगमेंट में। हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चला है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 10 लाख से ज़्यादा पैसेंजर व्हीकल बेचे गए, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह वाकई एक प्रभावशाली उपलब्धि है।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून तक कुल 10.12 लाख पैसेंजर व्हीकल की बिक्री हुई। इस बिक्री में पश्चिमी क्षेत्र ने शानदार प्रदर्शन किया, जहां 3.21 लाख यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई। यह दिखाता है कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में गाड़ियों की डिमांड लगातार बढ़ रही है।
राज्यों के हिसाब से देखा जाए तो महाराष्ट्र ने बिक्री चार्ट में टॉप किया। जून तिमाही में केवल महाराष्ट्र में 1.19 लाख यूनिट्स पैसेंजर व्हीकल बेचे गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा का नंबर आता है। इन राज्यों में भी गाड़ियों की मजबूत डिमांड देखने को मिली है, जो ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक अच्छा संकेत है।
पैसेंजर व्हीकल के साथ-साथ, दोपहिया सेगमेंट में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि के दौरान पूरे देश में 46.75 लाख दोपहिया वाहन बेचे गए। इसमें भी पश्चिमी राज्यों का दबदबा रहा, जहां 14.19 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई। उत्तर प्रदेश ने दोपहिया वाहनों की बिक्री में सभी को पीछे छोड़ दिया, यहां 8.18 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई। इसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार और मध्य प्रदेश रहे। यह बताता है कि भारत में commuters के लिए दोपहिया वाहन आज भी एक पसंदीदा विकल्प बने हुए हैं।
कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी महाराष्ट्र ने अपना नेतृत्व बनाए रखा। जून तिमाही में महाराष्ट्र में 32,000 यूनिट्स कमर्शियल व्हीकल बिके। पूरे देश में इस अवधि में कुल 2.23 लाख कमर्शियल व्हीकल की बिक्री हुई। यह आंकड़े देश के बढ़ते logistics और transportation सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो आर्थिक विकास का एक प्रमुख संकेतक है।
तीन पहिया वाहनों की बिक्री भी मजबूत रही, जो 1.65 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। इस सेगमेंट में उत्तर प्रदेश ने 21,000 यूनिट्स के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना भी इस लिस्ट में शामिल रहे। तीन पहिया वाहन, खासकर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और छोटे व्यवसायों के लिए, भारत में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
यहां कुछ और जानकारी मिलती है; जुलाई 2025 में, कंपनियों से डीलर्स तक पैसेंजर व्हीकल की डिलीवरी में मामूली गिरावट आई। यह पिछले साल की 3,41,510 यूनिट्स से घटकर 3,40,772 यूनिट्स हो गई। यह छोटे उतार-चढ़ाव उद्योग का हिस्सा होते हैं और इन्हें सामान्य माना जाता है।
आगे चलकर, आगामी Goods and Services Tax (GST) reforms का ऑटोमोबाइल सेक्टर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। केंद्र सरकार एंट्री-लेवल पैसेंजर व्हीकल और दोपहिया वाहनों पर tax को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है। यह दिवाली से पहले इन वाहनों को और अधिक किफायती बना देगा, जिससे बिक्री में और तेज़ी आने की संभावना है।
वर्तमान में, combustion engines से चलने वाले सभी पैसेंजर व्हीकल पर 28 प्रतिशत GST लगता है, साथ ही इंजन की क्षमता, लंबाई और बॉडी टाइप के आधार पर 1 प्रतिशत से 22 प्रतिशत तक कंपनसेशन सेस भी लगता है। GST में कमी से ग्राहकों को सीधे फायदा होगा, जिससे ‘भारत में पैसेंजर व्हीकल’ की डिमांड में और इजाफा होगा। यह निश्चित रूप से ऑटोमोबाइल कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक स्वागत योग्य कदम होगा।
कुल मिलाकर, ‘भारत में पैसेंजर व्हीकल’ की बिक्री के आंकड़े देश के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक मजबूत और आशाजनक तस्वीर पेश करते हैं। यह वृद्धि न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। आगामी GST reforms के साथ, यह सेक्टर भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार है।