
बीएसपी प्रमुख मायावती ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नकाब विवाद में दखल दिया है। उन्होंने शनिवार को इस मामले पर गहरी चिंता जताई और कहा कि नीतीश कुमार को खेद व्यक्त करना चाहिए।
मायावती ने कहा कि यह विवाद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका मानना है कि बाद में मंत्रियों के कुछ बयानों से यह विवाद और बढ़ गया है।
यह घटना सोमवार को पटना में मुख्यमंत्री सचिवालय में घटी थी। आयुष डॉक्टरों को उनकी नियुक्ति पत्र दिए जा रहे थे।
जब एक महिला डॉक्टर अपना पत्र लेने आई तो नीतीश कुमार ने उसके नकाब पर नजर डाली। उन्होंने पूछा, यह क्या है, और फिर उसका परदा हटा दिया।
इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। मायावती ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
मायावती ने कहा कि यह मामला महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप से इसका समाधान होना चाहिए था।
उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को इस घटना को सही परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। उन्हें खेद व्यक्त करना चाहिए और इस बढ़ते विवाद को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
मायावती ने उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की एक विवादास्पद घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पुलिस परेड के दौरान एक धार्मिक प्रचारक को सलामी देना नियमों से हटकर है।
इस घटना ने भी एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मायावती ने कहा कि इससे राज्य सरकार कठिनाई में पड़ गई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस परेड और सलामी की अपनी परंपरा, अनुशासन और पवित्रता होती है। इसमें छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
मायावती ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है कि राज्य के पुलिस प्रमुख ने जिला पुलिस प्रमुख से स्पष्टीकरण मांगा है। अब लोग कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले को गंभीरता से ले। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
मायावती ने कहा कि बहराइच की घटना राज्य और संसद के विधायी सत्रों की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने इस पर गहरी चिंता जताई।
उनका कहना है कि ऐसे मामलों से सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचती है। सरकारों को इन पर संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए।
मायावती के बयान से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल भी इन मुद्दों पर सरकारों को घेर रहे हैं।
यह स्पष्ट है कि नकाब विवाद और बहराइच की घटना अब राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गए हैं। इन पर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपेक्षा की जा रही है।










