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भारत में LPG यानी Liquefied Petroleum Gas घरेलू रसोई का सबसे महत्वपूर्ण ईंधन बन चुका है, लेकिन इसकी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा अभी भी विदेशों पर निर्भर है। हाल के ऊर्जा आंकड़ों के अनुसार भारत की सालाना LPG खपत लगभग 33 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है। इसमें से करीब 13 मिलियन टन LPG देश के भीतर refinery और gas processing plant में तैयार होता है, जबकि लगभग 20 मिलियन टन से अधिक LPG Import के जरिए आता है। इसका मतलब है कि भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से खरीदता है। यही कारण है कि india-lpg-import-middle-east आज भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
दरअसल भारत के LPG Import का सबसे बड़ा स्रोत Middle East क्षेत्र है। Saudi Arabia, Qatar, Kuwait और United Arab Emirates जैसे देश भारत को LPG सप्लाई करते हैं। अनुमान है कि भारत के कुल LPG Import का करीब 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। इन देशों से आने वाला अधिकांश LPG tanker Persian Gulf से निकलकर Hormuz Strait के रास्ते भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचता है। ऐसे में india-lpg-import-middle-east की निर्भरता सिर्फ व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि समुद्री मार्ग और भू-राजनीतिक हालात से भी सीधे जुड़ी हुई है।
भारत में LPG Production मुख्य रूप से crude oil refining प्रक्रिया और natural gas processing के दौरान होता है। देश की बड़ी कंपनियां जैसे Indian Oil, Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum और Reliance Industries अपनी refinery में propane और butane जैसे तत्वों से LPG तैयार करती हैं। इसके अलावा GAIL जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी gas processing plant के जरिए LPG उत्पादन करते हैं। हालांकि देश के refinery नेटवर्क के बावजूद घरेलू LPG Production अभी कुल मांग का केवल लगभग 40 प्रतिशत ही पूरा कर पाता है। यही वजह है कि india-lpg-import-middle-east भारत की ऊर्जा रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
भारत में LPG का सबसे बड़ा उपयोग घरेलू cooking fuel के रूप में होता है। कुल LPG खपत का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा household kitchens में इस्तेमाल होता है, जबकि बाकी हिस्सा होटल, restaurant, industry और commercial sector में जाता है। सरकार की Ujjwala Scheme और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस कनेक्शन बढ़ने से LPG की मांग पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है। पहले जहां ग्रामीण परिवार लकड़ी या कोयले से खाना बनाते थे, वहीं अब करोड़ों परिवार LPG सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं। इसी वजह से india-lpg-import-middle-east का महत्व और बढ़ गया है क्योंकि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आयात जरूरी हो गया है।
हाल के समय में West Asia क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण LPG सप्लाई को लेकर चिंता भी सामने आई है। Hormuz Strait जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा सीधे LPG shipment को प्रभावित कर सकती है। जब भी इस क्षेत्र में सैन्य या राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तब tanker की आवाजाही धीमी हो जाती है और freight cost भी बढ़ जाती है। ऐसे में india-lpg-import-middle-east पर निर्भरता भारत के लिए जोखिम भी पैदा करती है। यही कारण है कि सरकार अब अमेरिका, नॉर्वे और अन्य देशों से LPG Import बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रही है।
आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा नीति का बड़ा लक्ष्य यही है कि LPG Production को बढ़ाया जाए और आयात पर निर्भरता कम की जाए। refinery क्षमता विस्तार, gas processing infrastructure और storage facility को मजबूत करने की योजनाएं इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। साथ ही कई शहरों में Piped Natural Gas यानी PNG network का विस्तार भी किया जा रहा है ताकि घरेलू cooking fuel के लिए LPG पर दबाव कम हो सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक ईंधन का विस्तार जारी रहा तो आने वाले समय में india-lpg-import-middle-east की निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा अधिक मजबूत हो सकती है।











