MS Dhoni बुजुर्गों के साथ ‘बचपना’ अभियान को प्रमोट करते हुए
पूर्व भारतीय कप्तान MS Dhoni ने एक स्वास्थ्य अभियान के दौरान ‘बचपना’ को लेकर बड़ा संदेश दिया, जहां उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ भी बचपना खत्म नहीं होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में हृदय रोग से करीब 28 प्रतिशत मौतें हो रही हैं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यही है कि बचपना बनाए रखते हुए स्वस्थ जीवन जिया जाए और समय पर इलाज व जांच को प्राथमिकता दी जाए।
दरअसल, ‘बचपना’ को केंद्र में रखकर चलाए जा रहे इस अभियान में निवारक देखभाल, नियमित जांच और परिवार के साथ समय बिताने पर जोर दिया गया है। Dhoni ने कहा कि बचपना केवल उम्र का नहीं बल्कि सोच और जीवनशैली का हिस्सा है। ऐसे में अगर लोग अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ समय बिताएं, तो उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर हो सकता है। इस पहल के जरिए युवाओं को अपने परिवार के बुजुर्गों के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आज की Lifestyle में बदलाव और कम Physical Activity के कारण कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक 24 प्रतिशत से अधिक वयस्क भारत में Overweight या Obesity का सामना कर रहे हैं, जिससे हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसी बीच ‘बचपना’ को बनाए रखने का मतलब है सक्रिय रहना, खेलना और सकारात्मक मानसिकता अपनाना, जिससे इन बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
वहीं इस अभियान का असर समाज पर भी देखने को मिल सकता है। जानकारों के अनुसार, अगर लोग बचपना को अपनाते हुए बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं, तो इससे परिवारिक संबंध मजबूत होंगे और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा। ऐसे में बचपना केवल एक भावनात्मक विचार नहीं बल्कि एक सामाजिक जरूरत बनता जा रहा है। इससे अकेलेपन और अवसाद जैसी समस्याओं को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
इसी बीच अभियान को Digital और Media प्लेटफॉर्म पर बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें। लोग अपने दादा-दादी के साथ बिताए गए पलों को साझा कर सकते हैं और इस संदेश को आगे बढ़ा सकते हैं कि बचपना किसी भी उम्र में जरूरी है। इस तरह यह पहल एक राष्ट्रीय संवाद का रूप लेती जा रही है, जिसमें स्वास्थ्य और भावनात्मक जुड़ाव दोनों शामिल हैं।
ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या यह सोच लंबे समय तक समाज में बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बचपना को जीवनशैली का हिस्सा बना लिया जाए, तो स्वस्थ बुढ़ापा संभव है। MS Dhoni का यह संदेश केवल एक अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर परिवार के लिए एक याद दिलाने वाला विचार है कि उम्र बढ़ने के बावजूद जीवन की खुशी और ऊर्जा को बनाए रखना जरूरी है।











