
ईरान युद्ध के बीच कतर के ऊर्जा सेक्टर को बड़ा झटका लगा है। देश की LNG सप्लाई क्षमता का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा अचानक बंद हो गया है। इससे हर साल लगभग 20 अरब डॉलर यानी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह असर 3 से 5 साल तक बना रह सकता है, जिससे global energy market में भारी अस्थिरता देखने को मिल रही है। इस संकट का सीधा असर भारत समेत एशिया और यूरोप के कई देशों पर पड़ने वाला है।
दरअसल हाल ही में हुए हमलों में कतर के Ras Laffan क्षेत्र में स्थित बड़े LNG प्लांट को नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार 14 में से कम से कम 2 LNG trains और एक gas-to-liquids facility प्रभावित हुई हैं। इससे करीब 12.8 million tonnes प्रति वर्ष LNG उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है। इसी बीच कई long-term contracts पर force majeure लागू करना पड़ा, जिससे सप्लाई चेन में अचानक रुकावट आ गई है।
तकनीकी तौर पर देखें तो यह नुकसान केवल LNG तक सीमित नहीं है। helium export में करीब 14 प्रतिशत, LPG में 13 प्रतिशत और condensate में 24 प्रतिशत तक गिरावट आने की आशंका है। जानकारों के अनुसार helium semiconductor industry के लिए बेहद जरूरी है, ऐसे में South Korea और अन्य chip manufacturing देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है। वहीं भारत में LPG की कीमतों और availability पर भी दबाव बढ़ सकता है।
अब सवाल यह है कि इसका असर आम लोगों तक कैसे पहुंचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि gas और oil की global कीमतों में तेजी आएगी, जिससे inflation बढ़ सकता है। यूरोप और एशिया के देशों में energy cost बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में LNG import करते हैं, उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इससे restaurant sector, transport cost और household gas bill तक प्रभावित हो सकते हैं।
इसी बीच कुछ देशों ने स्थिति को संभालने के लिए वैकल्पिक उपाय शुरू कर दिए हैं। South Korea ने साफ कहा है कि वह alternative energy sources जैसे coal और nuclear power पर निर्भरता बढ़ाएगा। वहीं China और Europe भी दूसरे suppliers की तलाश में हैं। हालांकि short term में supply gap को पूरी तरह भर पाना मुश्किल माना जा रहा है।
आगे की स्थिति को लेकर uncertainty बनी हुई है। अगर क्षेत्र में तनाव जारी रहता है तो North Field expansion project में भी देरी हो सकती है, जो global LNG supply के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में qatar-lng-crisis आने वाले वर्षों में energy market, inflation और global economy को गहराई से प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह संकट 2022 के energy shock जैसा बड़ा असर डाल सकता है, जिससे आने वाले समय में fuel prices और economic growth दोनों पर दबाव बना रहेगा।









