
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर जमकर निशाना साधा। पश्चिम बंगाल में घुसपैठ को लेकर शाह के बयानों के जवाब में बनर्जी ने उन्हें ‘देश के असफल गृहमंत्री’ करार दिया।
अभिषेक बनर्जी मंगलवार दोपहर दिल्ली के लिए रवाना हुए, जहाँ वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने जा रहे हैं। इस मुलाकात का मकसद पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के मसौदे पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है।
दिल्ली रवाना होने से पहले, बनर्जी ने कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने इसके लिए भाजपा के दो सांसदों के हालिया बयानों का हवाला दिया। बनर्जी ने नादिया जिले की रानाघाट सीट से भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार और राज्यसभा सांसद अनंत महाराज के बयानों को याद दिलाया।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘हाल ही में अनंत महाराज ने गृहमंत्री अमित शाह को मूल रूप से पाकिस्तानी और इसलिए घुसपैठिया बताया। वहीं जगन्नाथ सरकार ने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद अगर भाजपा सत्ता में आई तो बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा खत्म हो जाएगी।’
उन्होंने आगे कहा, ‘इसके बावजूद पार्टी के इन दोनों सांसदों को भाजपा नेतृत्व की तरफ से कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया। और केंद्रीय गृहमंत्री के तौर पर अमित शाह सीमा पर सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।’
तृणमूल नेता के मुताबिक, दिल्ली में हाल की आतंकी विस्फोट घटना बिहार विधानसभा चुनाव से महज चार दिन पहले हुई थी। ‘उससे चार दिन पहले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में चार आतंकियों ने 26 पर्यटकों को मार डाला था। सीमा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है।’
‘दिल्ली पुलिस भी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। इन मुद्दों को हल करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री ने क्या किया? वह भारत की आजादी के बाद से सबसे असफल गृहमंत्री हैं,’ अभिषेक बनर्जी ने दावा किया।
उन्होंने मंगलवार को ही गृहमंत्री शाह के एक और दावे को भी खारिज कर दिया। शाह ने मतुआ समुदाय और नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले अन्य धार्मिक शरणार्थियों को उनके मतदान अधिकारों का आश्वासन दिया था।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, ‘एक तरफ केंद्रीय गृहमंत्री पश्चिम बंगाल के मतुआओं को उनके मतदान अधिकारों का भरोसा दिला रहे हैं। दूसरी तरफ, लोकसभा में भाजपा के मतुआ प्रतिनिधि शांतनु ठाकुर दावा कर रहे हैं कि अगर मतुआओं के नाम मतदाता सूची से हट भी गए तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’
उन्होंने कहा कि यह दोहरे चरित्र और विभाजनकारी राजनीति का जीता-जागता उदाहरण है।
अभिषेक बनर्जी का यह तीखा हमला राज्य और केंद्र सरकार के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। मतदाता सूची को लेकर विवाद और सीमा सुरक्षा के मुद्दे गरमा रहे हैं।
राजनीतिक नेताओं के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले समय में और तेज हो सकता है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आने वाले चुनावी मौसम में और बढ़ेगा। दोनों ही दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने में जुटे हुए हैं।
मतुआ समुदाय का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में हमेशा से अहम रहा है। नागरिकता कानून को लेकर यह बहस अब नए सिरे से शुरू हो गई है।
अभिषेक बनर्जी का दिल्ली दौरा और चुनाव आयोग से मुलाकात इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ ला सकती है। आने वाले दिनों में राजनीतिक गलियारों में इन मुद्दों पर गर्मागर्म बहस जारी रहने की उम्मीद है।










