
पटना, 20 अगस्त। बिहार राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने राज्य भर में “राजस्व महा अभियान” शुरू किया है। यह अभियान 16 अगस्त से शुरू हुआ और इसका मुख्य उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को अपडेट, सही करने और डिजिटाइज करना है। इससे नागरिकों को पारदर्शिता और आसान पहुंच मिलेगी। इस पहल के तहत भूमि दस्तावेजों में त्रुटियों को दूर किया जाएगा, पैतृक संपत्ति को वैध उत्तराधिकारियों के नाम किया जाएगा और जमींदारों को उनका अपडेटेड जमाबंदी (भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड) उनके घर पर ही दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, विशेष ध्यान उन जमीनों पर दिया जा रहा है जो अभी भी मृत पूर्वजों के नाम पर दर्ज हैं। ऐसे मामलों में, कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम पर नए जमाबंदी रिकॉर्ड बनाए जाएंगे और रजिस्टर-2 में उत्तराधिकार का विवरण अपडेट किया जाएगा। भविष्य में भूमि कर की रसीदें भी उनके नाम पर जारी की जाएंगी। जहां जमीन संयुक्त रूप से रखी गई है, वहां आपसी समझौतों, पंजीकृत विभाजन या अदालती आदेशों के आधार पर नए जमाबंदी रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान सिर्फ नाम, खाता संख्या, प्लॉट नंबर या भूमि क्षेत्र के विवरण को सही करने तक सीमित नहीं है बल्कि सभी रिकॉर्ड के पूर्ण डिजिटलीकरण तक फैला हुआ है। एक बार डिजिटाइज हो जाने के बाद, जमींदारों को बैंक ऋण, मुआवजा, सरकारी योजनाएं और संपत्ति लेनदेन के लिए परेशानी मुक्त पहुंच का लाभ मिलेगा।
यह अभियान हर हल्के (स्थानीय राजस्व इकाई) में शिविरों के माध्यम से चलाया जा रहा है, जहां प्रत्येक क्षेत्र में दो शिविर आयोजित किए गए हैं। सिर्फ सीतकी अंचल में ही 57 गांवों को शामिल किया गया है। 18 अगस्त तक, अधिकारियों ने पहले ही 87,000 से अधिक जमाबंदी प्रतियां वितरित कर दी थीं, जबकि जिले भर में 15 लाख से अधिक रिकॉर्ड को सुधारने के लिए चिन्हित किया गया है।
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि उत्तराधिकारियों को अब रिकॉर्ड सही करने के लिए सर्कल और जिला कार्यालयों के बीच चक्कर नहीं काटने होंगे या रिश्वत नहीं देनी होगी। इसके बजाय, अपडेटेड भूमि दस्तावेज सीधे उनके घर पहुंचाए जाएंगे। यह अभियान 30 अक्टूबर तक चलेगा और इससे भूमि विवाद कम होंगे और किसानों को एक पारदर्शी डिजिटल सिस्टम के तहत वैध स्वामित्व मिलेगा, जो डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत करेगा।