बिहार में आज सत्ता और पार्टी स्तर पर सियासी करेक्टर्शिफ्ट भरे हुए हैं। बिहार कांग्रेस (Indian National Congress) ने अपने दो सीनियर नेताओं को पार्टी के नाम पर जारी बयान और गतिविधियों को वजह मानते हुए छह साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से बाहर निकाल दिया है। कांग्रेस पार्टी के डिसिप्लिनरी कमिटी के चेयरमैन राजेश राठौर ने बताया कि पूर्व विधायक छत्रपति यादव और पूर्व स्पोक्सपर्सन आनंद माधव के खिलाफ पार्टी के मूल सिद्धांतों और अनुशासन का बार-बार उल्लंघन करने के आरोप के चलते यह कार्रवाई की गई है। पार्टी ने साफ कहा कि अनुशासनहीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और इस कदम से कांग्रेस के संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत किया जाएगा। यह घोषणा 18 फरवरी 2026 को की गई थी और पार्टी के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अगली छह साल तक ये दोनों नेता पार्टी के किसी भी पद या चुनावी गतिविधि में नहीं रहेंगे। इस मामले ने बिहार के राजनीतिक माहौल में कांग्रेस के इंटर्नल मैनेजमेंट और पार्टी यूनिटी को लेकर व्यापक चर्चा को बढ़ावा दिया है।
उसी दिन दूसरी ओर बिहार की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सहयोगी दलों ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar के सामने liquor ban यानी शराबबंदी नीति पर समीक्षा और पुनर्विचार की मांग उठाई है। एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि शराबबंदी के लागू होने के बाद से प्रदेश को आर्थिक और प्रशासनिक दृष्टि से नुक्सान हुआ है। उनमें Union Minister Jitan Ram Manjhi ने कहा कि हालांकि शराबबंदी की भावना ठीक है, पर इसके अमल में कई कमियाँ हैं और इस वजह से राजस्व घाटा और अवैध शराब की मांग बढ़ी है। इन सहयोगी दलों ने Nitish Kumar से कहा कि इस liquor policy की समीक्षा कर उसके नुकसान और फायदे दोनों पक्षों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
बिहार विधानसभा सत्र और पार्टी बैठक के दौरान भी सदन में हंगामा और बयानबाज़ी देखने को मिली है। कुछ सदस्यों ने कहा कि शराबबंदी के कारण युवाओं और ग्रामीण इलाकों में असंतोष बढ़ा है, जबकि सरकार इस नीति को महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताती रही है। Nitish Kumar के पार्टी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व में इस मुद्दे पर संतुलित निर्णय लेने की कोशिश जारी है। विपक्षी पार्टियों ने भी इस नीति को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की है और कहा है कि जनता को इससे हुई आर्थिक तंगी का हिसाब देना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसके पीछे बड़ी वजह यह भी है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की प्रचंड जीत के बावजूद liquor ban जैसी सामाजिक नीतियों को लेकर सरकार को भीतर से मजबूत समर्थन सुनिश्चित करना पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव में NDA ने कुल 243 सीटों में से 202 सीटें जीतीं, जिसमें BJP और JDU के अलावा LJP और अन्य घटक दलों ने भी सफलता हासिल की थी। इसके बावजूद, गठबंधन में मौजूद सबका समर्थन लेना Nitish Kumar के लिए चुनौती बनी हुई है।
इन दोनों घटनाओं — कांग्रेस के नेताओं को पार्टी से निष्कासित करने और NDA सहयोगियों की शराबबंदी समीक्षा की मांग — ने बिहार के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक जटिल और बहुआयामी बना दिया है। Nitish Kumar अपनी पार्टी JDU और गठबंधन NDA के भीतर संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ सियासी फैसलों की घोषणा पर काम कर रहे हैं, ताकि अगले महीनों में विधानसभा सत्र और स्थानीय चुनावों का असर सकारात्मक रूप में दिखे।











