
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने चेन्नई-बेंगलुरु और चेन्नई-हैदराबाद मार्गों पर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के विकास की बात कही है। इससे चेन्नई से दूसरे राज्यों के बीच तेज़ कनेक्टिविटी की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।
ये प्रस्तावित कॉरिडोर 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों के लिए डिज़ाइन किए जाएंगे। इसका मतलब है कि दक्षिण के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
चेन्नई-बेंगलुरु हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का संरेखण निर्माणाधीन बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे के साथ होने की संभावना है। यह मार्ग कांचीपुरम, आरक्कोणम और चित्तूर से होकर गुजरेगा।
चूंकि एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग पूरा होने वाला है, इसलिए योजनाकार इसे रेल संरेखण के लिए एक प्राकृतिक रीढ़ मान रहे हैं। लगभग 290 से 300 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से चेन्नई और बेंगलुरु के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग एक घंटा 13 मिनट रह जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, 778 किलोमीटर लंबे चेन्नई-हैदराबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर पर अभी तक अपेक्षाकृत कम खोजबीन हुई है। इसके संरेखण का केवल लगभग 61 किलोमीटर का हिस्सा ही तमिलनाडु में पड़ता है।
इस वजह से चेन्नई तक बेहतर पहुंच के अलावा, इस परियोजना का राज्य पर सीधा विकासात्मक प्रभाव सीमित ही रहेगा। एक बार चालू होने के बाद, इस कॉरिडोर से चेन्नई और हैदराबाद के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग दो घंटे पांच मिनट रह जाने की उम्मीद है।
यह घोषणा दक्षिण भारत के आर्थिक केंद्रों को और मजबूती से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हाई-स्पीड रेल न केवल यात्रा को तेज़ करेगी बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी गति देगी।
चेन्नई-बेंगलुरु मार्ग पर काम पहले से चल रही एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़ा होने के कारण तेजी से आगे बढ़ सकता है। इससे निर्माण लागत और समय दोनों में बचत होने की संभावना है।
हाई-स्पीड रेल का मतलब सिर्फ तेज ट्रेनें नहीं है। यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नई तकनीक और रोजगार के अवसर भी लेकर आएगी।
चेन्नई से हैदराबाद का लंबा मार्ग भी अब दो घंटे से थोड़ा ज्यादा का सफर रह जाएगा। यह समय में भारी कमी है जो दोनों महानगरों के बीच आवाजाही को बदल देगी।
बजट में इस हाई-स्पीड रेल परियोजना का जिक्र राज्यों के बीच बेहतर संपर्क के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह देश के परिवहन नक्शे पर एक नया अध्याय जोड़ेगा।
यात्रियों के लिए यह सुविधा न केवल आरामदायक होगी बल्कि समय की बचत भी करेगी। व्यापारी एक दिन में दो शहरों की यात्रा आसानी से कर सकेंगे।
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण से रियल एस्टेट और संबंधित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्टेशनों के आसपास के इलाके तेजी से विकसित होंगे।
इस तरह की बड़ी परियोजनाएं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हाई-स्पीड रेल भारत को एक आधुनिक परिवहन प्रणाली की ओर ले जाएगी।
चेन्नई अब दो प्रमुख टेक और औद्योगिक केंद्रों से सीधे जुड़ जाएगा। यह कनेक्टिविटी शहर की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगी।










