
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बारापुल्ला एलिवेटेड रोड फेज 3 प्रोजेक्ट में अनियमितताओं की जांच के लिए एंटी करप्शन ब्रांच को निर्देश दिए हैं। यह कदम ठेकेदार को 175 करोड़ रुपये के भुगतान के बाद उठाया गया है। सोमवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया, जहां इस प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी और पूर्व प्रबंधन की समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी की इस बैठक में प्रोजेक्ट से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया। सूत्रों के अनुसार, प्रोजेक्ट को पूरा करने में हुई देरी और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
यह प्रोजेक्ट दिल्ली की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन समय सीमा पूरी न हो पाने के कारण इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बारापुल्ला एलिवेटेड रोड का यह तीसरा चरण है, जिसे पूरा होने के बाद यातायात की समस्या में काफी हद तक सुधार आने की उम्मीद है।
जांच के दायरे में ठेकेदार कंपनी और उसके साथ हुए समझौतों की पड़ताल शामिल होगी। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि क्या प्रोजेक्ट में देरी के पीछे कोई गलत इरादा तो नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में किसी गलत कार्य का पता चलता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे इंजीनियरों और कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कई बार संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह कमी प्रबंधन की लापरवाही के कारण थी या फिर कोई और वजह थी।
दिल्ली सरकार का यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय निवासियों ने इस जांच का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे प्रोजेक्ट की गति तेज होगी।
शहर के यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि इस रोड प्रोजेक्ट के पूरा होने से न सिर्फ ट्रैफिक की समस्या कम होगी, बल्कि यह दिल्ली के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगा। अब सभी की नजरें इस जांच के परिणाम पर टिकी हैं, जो भ्रष्टाचार के आरोपों पर विराम लगा सकती है।