
भारत निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। यह स्पष्टीकरण पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के दावों और आपत्तियों पर होने वाली सुनवाई सत्रों से जुड़ा है।
आयोग ने कहा है कि सरकार द्वारा जारी किए गए भूमि या घर आवंटन प्रमाणपत्र के विकल्प के रूप में अन्य प्रमाणपत्र मान्य पहचान दस्तावेज नहीं माने जाएंगे। ये सुनवाई सत्र शनिवार से शुरू हो चुके हैं।
निर्वाचन आयोग ने कुल तेरह दस्तावेजों को मान्य पहचान दस्तावेजों की सूची में शामिल किया है। इनमें से ग्यारहवां दस्तावेज सरकार द्वारा जारी कोई भी भूमि या घर आवंटन प्रमाणपत्र है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अंदरूनी सूत्रों ने जानकारी दी है। उनके अनुसार, आयोग के डेटाबेस में पहचान दस्तावेज अपलोड करने की प्रणाली को एक विशेष तरीके से प्रोग्राम किया गया है।
इस प्रणाली में आयोग द्वारा निर्दिष्ट सरकारी भूमि या घर आवंटन प्रमाणपत्र के अलावा कोई अन्य भूमि या आवास वित्त प्रमाणपत्र अपलोड नहीं किया जा सकता है। इस तकनीकी सीमा का एक सीधा प्रभाव है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक सूत्र ने इसका कारण समझाया। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार की बंगलर बारी योजना के तहत जारी प्रमाणपत्र स्वतः एक वैध पहचान दस्तावेज नहीं माने जाएंगे।
आयोग द्वारा बंगलर बारी प्रमाणपत्र को भूमि या घर आवंटन प्रमाणपत्र के समकक्ष न मानने के पीछे तर्क स्पष्ट है। आयोग द्वारा निर्दिष्ट ग्यारहवां दस्तावेज एक विशिष्ट भूखंड या एक विशिष्ट घर की पहचान करता है।
यह दस्तावेज साबित करता है कि वह भूमि या मकान संबंधित मतदाता को आवंटित किया गया है। यह एक स्वामित्व या आवंटन का प्रमाण है।
दूसरी ओर, बंगलर बारी योजना केवल एक आवास वित्त योजना है। इस योजना के तहत, संबंधित मतदाता को घर खरीदने या बनाने के लिए धनराशि प्राप्त होती है।
इस योजना के तहत जारी प्रमाणपत्र किसी विशिष्ट भूखंड या विशिष्ट घर की पहचान नहीं करता है। यह प्रमाणपत्र केवल वित्तीय सहायता प्राप्त होने का सबूत है।
इसलिए, एक आवास वित्त प्रमाणपत्र को किसी भूमि या घर आवंटन प्रमाणपत्र के समकक्ष नहीं माना जा सकता है। यह अंतर ही मुख्य मुद्दा है।
दावों और आपत्तियों पर सुनवाई सत्र 27 दिसंबर से शुरू हो चुके हैं। इन सत्रों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए आवेदन किए जाते हैं।
इन सभी प्रक्रियाओं के बाद अंतिम मतदाता सूची अगले वर्ष 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। यह सूची आगामी विधानसभा चुनावों के लिए आधार बनेगी।
इस अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के कुछ समय बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। अगले वर्ष होने वाले ये विधानसभा चुनाव राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में पहचान दस्तावेजों की वैधता सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की प्राथमिकता है। यही कारण है कि बंगलर बारी जैसे प्रमाणपत्रों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मूल आधार होता है। निर्वाचन आयोग इस दिशा में सतर्कता बरत रहा है।









