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दुनिया के 22 देशों ने 21 मार्च 2026 को एक बड़ा संयुक्त कदम उठाते हुए Hormuz Strait में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से वैश्विक Oil सप्लाई का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। हालिया तनाव और हमलों के बीच इन देशों ने साफ कहा है कि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना अब प्राथमिकता बन गया है। इस बयान में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई बड़े देश शामिल हैं, जिससे यह कदम वैश्विक स्तर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
दरअसल पिछले कुछ दिनों में Hormuz Strait क्षेत्र में जहाजों पर हमले, ड्रोन स्ट्राइक और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ी हैं। इसी कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ है। कई देशों ने इसे “de facto बंद” जैसी स्थिति बताया है। ऐसे में इन 22 देशों ने मिलकर कहा है कि वे जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए “appropriate efforts” यानी जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं। इसमें नेवी एस्कॉर्ट, निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
जानकारों के अनुसार Hormuz Strait केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि Global Energy Market की रीढ़ है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ता है। हालिया घटनाओं के बाद Oil कीमतों में तेजी देखी गई है और कई देशों ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। इसी बीच कुछ देशों ने यह भी साफ किया है कि वे सैन्य तैनाती को लेकर सावधानी बरतेंगे, लेकिन कूटनीतिक और तकनीकी सहयोग जारी रहेगा।
वहीं इस संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री रास्तों की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी है। Hormuz Strait में लगातार तनाव के कारण व्यापारिक जहाजों की आवाजाही कम हुई है, जिससे एशिया और यूरोप के बीच सप्लाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में यह कदम केवल सुरक्षा नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो इसका असर भारत जैसे Oil आयात करने वाले देशों पर भी पड़ेगा।
इसी बीच कुछ देशों ने वैकल्पिक रास्तों और सुरक्षित कॉरिडोर बनाने पर भी चर्चा शुरू कर दी है। लगभग 20,000 समुद्री कर्मचारी इस संकट से प्रभावित बताए जा रहे हैं, जो विभिन्न जहाजों पर फंसे हुए हैं। ऐसे में Hormuz Strait को सुरक्षित करना केवल व्यापारिक नहीं बल्कि मानवीय मुद्दा भी बन गया है। कई देशों ने संयुक्त रूप से यह भी कहा है कि क्षेत्र में तनाव कम करना जरूरी है ताकि स्थिति और न बिगड़े।
अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा। क्या यह अंतरराष्ट्रीय गठबंधन वास्तव में Hormuz Strait को पूरी तरह सुरक्षित कर पाएगा या यह केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित रहेगा। फिलहाल इतना तय है कि 22 देशों का यह कदम वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा के लिए आने वाले दिनों में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।











