
भारतीय क्रिकेट टीम ने इंदौर के होलकर स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरा और अंतिम वनडे मैच 41 रनों से हार दिया। विराट कोहली के शानदार शतक के बावजूद यह हार टीम के लिए एक बड़ा झटका है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि भारत की हार न्यूजीलैंड की सी टीम के खिलाफ हुई। न्यूजीलैंड की टीम में केन विलियमसन, डैरिल मिशेल, लॉकी फर्ग्यूसन, ट्रेंट बोल्ट और ग्लेन फिलिप्स जैसे विशेषज्ञ खिलाड़ी शामिल नहीं थे।
अब सवाल उठ रहे हैं कि घरेलू मैदानों पर भी भारत लगातार क्यों हार रहा है। क्या कारण है ऑलराउंडर की कमी, रविंद्र जडेजा के प्रदर्शन में गिरावट, चयन में पक्षपात, कोचिंग की विफलताएं या शुभमन गिल की कप्तानी।
वर्तमान टीम कोच गौतम गंभीर के तहत फॉर्म से बाहर वयोवृद्ध खिलाड़ियों को प्राथमिकता देती दिख रही है। सरफराज खान, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, रुतुराज गायकवाड़, साई सुधर्शन और नितीश कुमार रेड्डी जैसे फॉर्म में युवाओं को अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
यह पक्षपात असंतुलन और असंतोष को जन्म दे रहा है। वयोवृद्ध खिलाड़ी अपनी प्रतिष्ठा के बल पर टीम में बने हुए हैं जबकि युवा खिलाड़ी प्रेरणा खो रहे हैं।
चयन प्रक्रिया में आईपीएल के हाइप और क्षेत्रीय पूर्वाग्रहों का भी दखल देखने को मिल रहा है। मुकेश कुमार जैसे आक्रामक गेंदबाजों के बजाय फॉर्म से बाहर खिलाड़ियों का चयन पक्षपात का संकेत देता है।
भारतीय बेंच की स्थिति चिंताजनक है। अक्षर पटेल मैच विजेता साबित नहीं हो पा रहे हैं और हार्दिक पांड्या की चोटों से भरी उपस्थिति पर भरोसा करना मुश्किल है।
इसके विपरीत न्यूजीलैंड के माइकल ब्रेसवेल ने बल्ले और गेंद दोनों से अपना योगदान देकर अंतर को उजागर किया। भारत की शीर्ष क्रम पर अत्यधिक निर्भरता मध्यक्रम को कमजोर बना रही है।
रविंद्र जडेजा जो कभी परम ऑलराउंडर हुआ करते थे अब दीवार से टकरा गए लगते हैं। हाल के समय में उनकी फील्डिंग में चूक बढ़ी है, बल्लेबाजी औसत गिरा है और गेंदबाजी आंकड़े निराशाजनक हैं।
प्रशंसक उन्हें पूजते हैं लेकिन भावनाएं टीम चयन पर हावी नहीं हो सकतीं। टीम को प्रदर्शन आधारित चयन की आवश्यकता है।
गौतम गंभीर का कार्यकाल मिलाजुला रहा है। उनके नेतृत्व में टीम ने दो ट्रॉफी जीती हैं लेकिन घरेलू परिस्थितियों में हार दिल दहला देने वाली रही हैं।
न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज 2024, ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज 2024-25 और दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज 2025 उल्लेखनीय रही हैं। वनडे में भारत ने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका से हार का सामना किया है।
कठोर चयन, ऑलराउंडर में निवेश और जडेजा जैसे सितारों के लिए प्रदर्शन आधारित कार्रवाई आगे का समाधान हो सकता है। सवाल यह है कि क्या भारत ये कठोर निर्णय ले पाएगा।
टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं के सामने अब बड़ी चुनौती है। घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देना और युवा प्रतिभाओं को अवसर देना समय की मांग है।
भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा की आवश्यकता है जहां प्रदर्शन सबसे ऊपर हो। केवल तभी टीम फिर से अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ सकेगी और जीत का स्वाद चख सकेगी।










