
नई दिल्ली, 12 अगस्त। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत और सिंगापुर के बीच तीसरी मंत्रिस्तरीय गोलमेज वार्ता (ISMR) 13 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। यह बैठक दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव इस बैठक में हिस्सा लेंगे।
सिंगापुर की टीम में उप प्रधानमंत्री और व्यापार मंत्री गन किम योंग, गृह मंत्री के. शनमुगम, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, डिजिटल विकास मंत्री जोसेफिन टियो, मैनपावर मंत्री तन सी लेंग और परिवहन मंत्री जेफ्री सिओ शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना से शुरू हुई ISMR पहल का पहला सम्मेलन सितंबर 2022 में नई दिल्ली में हुआ था। दूसरी बैठक अगस्त 2024 में सिंगापुर में आयोजित की गई थी।
भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के नए रास्ते तलाशे जाएंगे।
इसी कड़ी में, विदेश मंत्री जयशंकर ने 9 अगस्त को सिंगापुर के 60वें राष्ट्रीय दिवस पर बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों की सराहना की थी। उन्होंने कहा, “हमारी दोस्ती और बहुआयामी सहयोग को सलाम करता हूं।”
पिछले महीने विदेश मंत्री जयशंकर ने सिंगापुर दौरे के दौरान कई उच्च स्तरीय बैठकें की थीं। 13 जुलाई को हुए इस दौरे में उन्होंने सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम से मुलाकात की और उप प्रधानमंत्री गन किम योंग तथा विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के साथ वार्ता की।
इन बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और दूसरे ISMR सम्मेलन के नतीजों की समीक्षा की गई। निवेश, औद्योगिक पार्क, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचा, कौशल विकास और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही आसियान, इंडो-पैसिफिक और वैश्विक घटनाक्रम पर विचार साझा किए गए।
आर्थिक संबंधों को मजबूती देने के लिए जयशंकर ने टेमासेक होल्डिंग्स के चेयरमैन डिजाइनेट टियो ची हीन से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत में हो रहे परिवर्तन और टेमासेक के लिए निवेश के नए अवसरों पर बातचीत हुई।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये दौरे और बैठकें दोनों देशों के बीच निरंतर चल रहे उच्च स्तरीय संवाद का हिस्सा हैं, जो भारत के लिए सिंगापुर के साथ संबंधों के महत्व को दर्शाता है।