
मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ। यह 90.29 के स्तर पर कारोबार करने लगा। यह उछाल भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद आया है जिसने निवेशकों में आशावाद पैदा किया है।
इससे विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ा है। सोमवार को रुपया 91.53 पर बंद हुआ था। पिछले सत्र में यह दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचकर 48 पैसे मजबूत हुआ था।
ऐसा बताया जा रहा है कि इस उछाल में भारतीय रिजर्व बैंक की स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप की भूमिका रही। विश्लेषकों का कहना है कि रुपया डॉलर के मुकाबले और अधिक मजबूत हुआ फिर 90.20 से 91.20 के दायरे में समेकित हो गया।
यह मौजूदा स्तर 92 के ऊपर टिक न पाने के बाद एक सुधारात्मक पुलबैक का नतीजा है। बाजार के सहभागियों ने कहा कि यह पुलबैक सुधारात्मक प्रकृति का है।
उच्च समय सीमा पर व्यापक उच्च उच्च और उच्च निम्न संरचना अभी भी बरकरार है। विश्लेषकों के मुताबिक निकट अवधि की तकनीकी संरचना अभी भी रचनात्मक बनी हुई है।
90.50 से 90.80 के स्तर के नीचे टूटने से रुपया 90 से 89.80 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। एक नरम डॉलर रुपया एमसीएक्स बुलियन में उछाल को सीमित कर रहा है।
हालांकि कीमती धातुओं के लिए मध्यम अवधि का रुझान अभी भी सहायक बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा की।
इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफोन वार्ता के बाद की गई। इस समझौते में भारतीय सामानों पर पारस्परिक टैरिफ में 25 प्रतिशत से 18 प्रतिशत की कमी शामिल है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते में भारत की रूसी तेल खरीद कम करने और अमेरिका से आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। संभावित रूप से वेनेजुएला से भी आयात बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत अमेरिका व्यापार समझौते के बाद व्यापारिक अनिश्चितता कम हुई है। इससे भारतीय इक्विटी और डेट में विदेशी निवेश आकर्षित हो सकता है।
इससे रुपया की मांग को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि बाजार सहभागियों ने आगाह किया है कि आने वाले सत्रों में रिजर्व बैंक के रुख पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।
अमेरिका भारत व्यापार समझौते, यूरोपीय संघ भारत व्यापार समझौते और विकासोन्मुख बजट के संयोजन से बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा। इससे तत्काल विदेशी पूंजी प्रवाह शुरू होने की उम्मीद है।
इससे भारत का भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट्स की स्थिति में सुधार हो सकता है। यह एक महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक है।
विदेशी मुद्रा बाजार में यह गतिविधि वैश्विक आर्थिक हालात और घरेलू नीतियों पर निर्भर करती है। रुपये की यह मजबूती देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।










