
पूर्वोत्तर क्षेत्र के उद्योग संगठनों ने केंद्रीय बजट 2026-27 का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह बजट सभी क्षेत्रों और राज्यों के लिए एक सकारात्मक और सक्षम नीतिगत माहौल प्रदान करता है। यह समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के उत्तर पूर्व भारत क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष महेश सहरिया ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के आवंटन में 47 प्रतिशत की वृद्धि का स्वागत किया। इससे कुल आवंटन 5,915 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ा हुआ फंड पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे, सामाजिक विकास और आर्थिक क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
सीआईआई असम राज्य परिषद के अध्यक्ष और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक भास्कर फुकन ने पूर्वोत्तर में बौद्ध सर्किट पहल को एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और पर्यटन क्षमता को उजागर करेगी।
फुकन ने पूर्वोत्तर में अगरवुड क्षेत्र को बढ़ावा देने की घोषणा का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि इससे टिकाऊ खेती, मूल्यवर्धन और निर्यात को मजबूती मिलेगी। इससे ग्रामीण आजीविका के अवसर पैदा होंगे और एमएसएमई क्षेत्र का विकास होगा, खासकर असम और त्रिपुरा में।
फिक्की नॉर्थईस्ट एडवाइजरी काउंसिल के चेयरमैन रंजीत बर्थाकुर ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, विनिर्माण, एमएसएमई और बुनियादी ढांचे पर निरंतर जोर दीर्घकालिक विकास और रोजगार सृजन की ठोस नींव रखता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्गों के विस्तार और बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने का प्रयास पूर्वोत्तर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से असम के लिए फायदेमंद साबित होगा।
फिक्की नॉर्थईस्ट स्टेट काउंसिल के सह-अध्यक्ष लार्सिंग साव्यान ने पर्यटन, खेल, कौशल विकास और कृषि पर ध्यान केंद्रित करने की सराहना की। उनका मानना है कि इससे जमीनी स्तर पर आजीविका के अवसर पैदा होंगे।
उत्तर पूर्वी क्षेत्र के उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ ने सरकार की नीतियों का स्वागत किया। संगठन ने सरकार के सुधारों पर दृढ़ रहने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की प्रशंसा की।
उद्योग संगठन ने कहा कि एमएसएमई पर ध्यान, चैंपियन एसएमई के निर्माण और प्रस्तावित 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड से वित्त तक पहुंच आसान होगी। यह अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करेगा।
असम चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रूपम गोस्वामी ने कहा कि यह बजट पूर्वोत्तर के लिए विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटन प्रचार, स्वास्थ्य सेवा मजबूती और आजीविका सृजन पर बजट का फोकस इस क्षेत्र की विशाल आर्थिक और सामाजिक क्षमता को उजागर करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
अरेडा के अध्यक्ष पीके शर्मा ने टियर II और टियर III शहरों तथा मंदिर नगरों पर बजट के जोर को उत्साहजनक बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण आवंटन इस पहल को समर्थन देते हैं।
सभी उद्योग निकायों ने इस बजट को पूर्वोत्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप के रूप में देखा है। विभिन्न क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित योजनाओं और फंडिंग से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
बजट में पर्यटन और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया है। बौद्ध सर्किट और अगरवुड जैसे पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने से स्थानीय समुदायों को लाभ मिलेगा।
कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स में सुधार से व्यापार और वाणिज्य को नई दिशा मिलेगी। इससे पूर्वोत्तर राज्यों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से बेहतर एकीकरण हो सकेगा।
कौशल विकास और रोजगार सृजन पर जोर युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करेगा। यह पलायन की चुनौती से निपटने में भी मददगार साबित हो सकता है।
सामाजिक विकास और स्वास्थ्य सेवा के लिए बढ़े हुए आवंटन से जनजीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। यह टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।
उद्योग जगत का मानना है कि इस बजट से पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश का माहौल और बेहतर होगा। नीतिगत स्थिरता और स्पष्टता व्यवसायियों का विश्वास बढ़ाएगी।












