
नई दिल्ली: आयकर बिल (नंबर 2) 2025 एक बड़ा विधायी कदम है जो 63 साल पुराने आयकर कानून की जगह लेगा। इसे सोमवार को लोकसभा में महज तीन मिनट में बिना किसी चर्चा के पास कर दिया गया। इस दौरान विपक्षी दल बिहार में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही को लगातार बाधित कर रहे थे।
यह बिल टीडीएस, छूट और अन्य अनुपालन प्रावधानों को सरल बनाता है। साथ ही, इसमें व्यक्तियों को विलंबित फाइलिंग पर दंड के बिना रिफंड दावा करने की अनुमति दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसदीय पैनल की सिफारिशों को शामिल करते हुए एक अद्यतन संस्करण पेश किया।
विपक्ष के नारेबाजी के बीच बिल को वॉयस वोट के जरिए पास कर दिया गया। अब यह राज्यसभा की मंजूरी के लिए जाएगा और फिर राष्ट्रपति की सहमति के बाद कानून बन जाएगा। नया बिल वर्तमान आयकर अधिनियम के आकार और जटिलता को कम करता है, जिसमें धाराओं और अध्यायों की संख्या तेजी से कम हो गई है और शब्दों की संख्या लगभग आधी हो गई है।
आयकर (नंबर 2) बिल के उद्देश्यों और कारणों के बयान में कहा गया है कि चयन समिति की लगभग सभी सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार कर लिया है। साथ ही, हितधारकों से उन सुझावों को भी शामिल किया गया है जो प्रस्तावित कानूनी अर्थ को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं। इसमें अस्सेसमेंट ईयर और प्रीवियस ईयर जैसी भ्रामक अवधारणाओं को हटाकर ‘टैक्स ईयर’ जैसी समझने में आसान अवधारणा लाई गई है।
संशोधित बिल के अनुसार, व्यक्ति टीडीएस रिफंड का दावा कर सकेंगे, भले ही उनकी आय रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा समाप्त हो चुकी हो। इस तरह, वित्त मंत्रालय ने मौजूदा आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान को शामिल कर लिया है।
इस नए बिल के पास होने से करदाताओं को अब आयकर संबंधी प्रक्रियाओं में आसानी होगी। साथ ही, जटिल प्रावधानों को सरल बनाकर इसे अधिक उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है। यह कदम सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें वह पुराने और जटिल कानूनों को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है।