
मेघालय, जिसे दुनिया का सबसे नम स्थान माना जाता है, इस बार दक्षिण पश्चिम मानसून के मौसम में सबसे अधिक वर्षा घाटे वाला राज्य बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल मेघालय ने जहां सूखे प्रभावित झारखंड से भी कम बारिश प्राप्त की है, वहीं इस मौसम में घाटे की भरपाई की संभावना भी कम है।
यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि राज्य के कई हिस्सों की आजीविका और जल सुरक्षा बारिश पर निर्भर है। यहां लगभग 83 प्रतिशत आबादी वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर करती है, जबकि राज्य की 48 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य है।
1 जून से 28 जुलाई तक मेघालय में सामान्य 1,555.4 मिमी की तुलना में केवल 690.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यहां तक कि दुनिया के सबसे नम स्थान माने जाने वाले सोहरा में भी फरवरी से सितंबर तक बारिश की मात्रा में कमी का ट्रेंड देखा गया है।
एक शोध पत्र के अनुसार, जो 2022 में जर्नल ऑफ द इंडियन सोसाइटी ऑफ रिमोट सेंसिंग में प्रकाशित हुआ था, 1951-1960 के दशक में मेघालय के मध्य भागों में अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक वर्षा हुआ करती थी। समय के साथ शुष्क क्षेत्रों का आकार बढ़ता गया, खासतौर पर पश्चिमी, मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में।
वैज्ञानिकों द्वारा स्टैंडर्ड प्रिसिपिटेशन इंडेक्स (SPI) का उपयोग करके मेघालय में 1951 से 2020 के बीच दशकीय, मासिक और मौसमी वर्षा पैटर्न का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि हाल के दशकों में मेघालय के दक्षिणी और दक्षिण पूर्वी हिस्से पूर्वी खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स में अधिक वर्षा दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स में दर्ज की गई।
IMD द्वारा 1989 से 2018 के बीच दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा के एक अन्य विश्लेषण में मेघालय सहित पांच राज्यों नागालैंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में वर्षा में कमी का महत्वपूर्ण ट्रेंड दिखाया गया।
भले ही मेघालय में पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की तुलना में वर्षा की मात्रा अभी भी अधिक है, लेकिन यह कम होता ट्रेंड राज्य की समृद्ध वनस्पति और जीवों के लिए भी चिंता का विषय है, जो साल दर साल भारी बारिश के आदी हैं। मेघालय इंडो-बर्मा बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट का हिस्सा है, जो भारत के चार और दुनिया के 34 हॉटस्पॉट्स में से एक है।
दशकों से वार्षिक और मौसमी वर्षा में यह कमी और दुनिया के सबसे नम स्थानों में भी इस तरह का ट्रेंड जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सामने लाता है। मेघालय जैसे कृषि आधारित और जैव विविधता से संपन्न क्षेत्रों में यह बदलाव गंभीर असर डाल सकता है।
2025 के दक्षिण पश्चिम मानसून सीजन की बात करें तो इसकी शुरुआत जल्दी हुई और तेजी से आगे बढ़ा। बारिश 24 मई को जल्दी केरल पहुंच गई और 29 जून तक पूरे देश को कवर कर लिया। IMD ने पूरे सीजन के लिए सामान्य से अधिक बारिश (LPA का 106%) का अनुमान लगाया है, विशेष रूप से मध्य और दक्षिणी भारत में अधिक वर्षा की संभावना है। लेकिन मेघालय और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।