
Middle East में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए petrol पर excise duty को 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर कर दिया है, जबकि diesel पर excise duty को 10 रुपए से सीधे 0 रुपए कर दिया गया है। इसके साथ ही windfall tax को 21.5 रुपए प्रति लीटर तय किया गया है। इस फैसले के बाद fuel market में हलचल तेज हो गई है और आम लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय crude oil कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था। इसी बीच Middle East क्षेत्र में geopolitical तनाव बढ़ने के कारण oil supply पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में सरकार ने petrol excise duty में कटौती कर consumer price को नियंत्रित करने की कोशिश की है। diesel पर पूरी तरह excise हटाना transport sector के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
सरकार के इस फैसले में windfall tax को 21.5 रुपए प्रति लीटर बनाए रखना भी अहम माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार, इससे oil कंपनियों के अतिरिक्त मुनाफे को नियंत्रित किया जा सकेगा। वहीं policy makers का मानना है कि यह संतुलन बनाने की कोशिश है, ताकि एक तरफ consumer को राहत मिले और दूसरी तरफ revenue पर ज्यादा दबाव न पड़े। इसी बीच oil marketing कंपनियों ने भी कीमतों में बदलाव को लेकर internal review शुरू कर दिया है।
ऐसे में petrol excise duty में कटौती का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ सकता है। transport cost कम होने से daily use सामान की कीमतों में भी कुछ गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं logistics और supply chain पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। Market experts का कहना है कि अगर crude oil कीमतें स्थिर रहती हैं तो आने वाले दिनों में fuel prices में और नरमी आ सकती है।
वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है। विपक्ष जहां इसे देर से लिया गया कदम बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह global situation को ध्यान में रखकर लिया गया है। ram-navami जैसे बड़े त्योहारों के दौरान इस तरह की राहत से लोगों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है और consumption बढ़ने की संभावना है।
अब सवाल यह है कि आने वाले समय में petrol excise duty और fuel pricing किस दिशा में जाएगी। अगर Middle East तनाव और बढ़ता है तो oil supply पर और दबाव आ सकता है, जिससे सरकार को फिर से policy में बदलाव करना पड़ सकता है। फिलहाल इस फैसले से short term में राहत जरूर दिख रही है, लेकिन long term strategy पूरी तरह global oil market पर निर्भर करेगी।









