
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जापान और चीन के अपने दौरे को लेकर विश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि उनका यह दौरा भारत के राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएगा, साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व सुरक्षा में भी योगदान देगा।
PM मोदी नई दिल्ली से गुरुवार 29 अगस्त को जापान के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हुए थे। यह 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए था, जो 29 से 30 अगस्त तक निर्धारित था। यह लगभग सात सालों में उनकी जापान की पहली स्टैंडअलोन यात्रा थी।
अपनी रवानगी के बयान में PM मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर, मैं 15वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान के दो दिवसीय दौरे पर जा रहा हूं। अपनी इस यात्रा के दौरान, हम अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अगले चरण को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिसने पिछले ग्यारह वर्षों में लगातार और महत्वपूर्ण प्रगति की है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम अपने सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने, हमारे आर्थिक और निवेश संबंधों के दायरे और महत्वाकांक्षा का विस्तार करने और AI और सेमीकंडक्टर्स सहित नई और उभरती technology में सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। यह यात्रा हमारे सभ्यतागत बंधनों और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी एक अवसर होगी जो हमारे लोगों को जोड़ते हैं।”
जापान में अपना दौरा पूरा करने के बाद, प्रधानमंत्री Tianjin में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए चीन रवाना हुए। यह दौरा भारत के राष्ट्रीय हित को साधने के लिए महत्वपूर्ण था।
PM मोदी ने कहा, “जापान से, मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर Tianjin में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा करूंगा। भारत SCO का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य है। अपनी अध्यक्षता के दौरान, हमने नवाचार, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में नए विचार पेश किए हैं और सहयोग शुरू किया है।”
PM मोदी ने यह भी कहा कि भारत SCO सदस्यों के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “मैं शिखर सम्मेलन के इतर राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राष्ट्रपति पुतिन और अन्य नेताओं से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं।” यह बैठकें भारत के राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाने में सहायक होंगी।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इस महीने की शुरुआत में संसद को बताया था कि SCO के मुख्य लक्ष्य और कार्य इसके चार्टर के अनुच्छेद 1 में उल्लिखित हैं, जिसका शीर्षक ‘लक्ष्य और कार्य’ है। मुख्य लक्ष्यों में से एक है ‘आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के सभी अभिव्यक्तियों में संयुक्त रूप से मुकाबला करना, अवैध narcotics और हथियारों की तस्करी और अन्य प्रकार की transnational आपराधिक गतिविधि, और साथ ही अवैध प्रवासन के खिलाफ लड़ना’ ।
यह सभी प्रयास भारत के राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं ताकि देश को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्थिति में लाया जा सके। इन यात्राओं का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना नहीं, बल्कि बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका को भी बढ़ाना है। यह सब भारत के राष्ट्रीय हित और उसकी भविष्य की रणनीतिक दिशा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। PM Modi की कूटनीति भारत के राष्ट्रीय हित को सुनिश्चित करती है।