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पटना में 10 मार्च से शुरू हुए तीन दिवसीय Trade Fair में PM Vishwakarma Yojana के तहत पारंपरिक कारीगरों को बड़ा मंच मिला है। MSME Development Office परिसर में आयोजित इस मेले में करीब 60 स्टॉल लगाए गए हैं, जहां विभिन्न जिलों से आए कारीगर अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री कर रहे हैं। यह कार्यक्रम 10 से 12 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। PM Vishwakarma Yojana के लाभार्थियों को यहां प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ने का अवसर और अपने उत्पादों की सीधी बिक्री का मौका दिया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक Market से जोड़ना और छोटे कारीगरों की आय बढ़ाना है।
दरअसल PM Vishwakarma Yojana के अंतर्गत आयोजित इस Trade Fair का उद्घाटन बिहार विधानसभा के अध्यक्ष Prem Kumar ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह योजना पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि बिहार में लंबे समय से हस्तशिल्प और छोटे उद्योगों की समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन पहले संसाधनों और पूंजी की कमी के कारण कारीगर अपने कौशल को आगे नहीं बढ़ा पाते थे। अब PM Vishwakarma Yojana के जरिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और Market तक पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है। इससे छोटे कारीगरों की आय में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
MSME Development Office के निदेशक Rakesh Kumar Chaudhary ने बताया कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य कारीगरों को ऐसा मंच देना है जहां वे अपने उत्पादों को बड़े Market से जोड़ सकें। PM Vishwakarma Yojana के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण के दौरान सभी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसमें कपड़ा, सुई, धागा और अन्य उपकरण शामिल होते हैं। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता भी दिया जाता है ताकि प्रतिभागियों को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद PM Vishwakarma Yojana के तहत पहले चरण में लगभग 1 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है और आगे व्यवसाय बढ़ाने के लिए 2 से 3 लाख रुपये तक का अतिरिक्त लोन भी उपलब्ध कराया जाता है।
मेले में शामिल कई लाभार्थियों ने भी PM Vishwakarma Yojana के अनुभव साझा किए। सॉफ्ट टॉय बनाने वाली कारीगर Manita Azad ने बताया कि यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कारीगरों और बेरोजगार युवाओं के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से लोगों के कौशल में सुधार हो रहा है और वे स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वहीं Gaya जिले के Arvind Ravidas, जो पत्थर की मूर्तियां बनाते हैं, ने बताया कि PM Vishwakarma Yojana से मिली ट्रेनिंग और वित्तीय सहायता से उनके काम की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। अब वह अलग-अलग शहरों में आयोजित मेलों में अपने उत्पाद बेचकर अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं।
इसी बीच कई अन्य कारीगरों ने भी बताया कि PM Vishwakarma Yojana से उन्हें नई पहचान मिली है। लाभार्थी Ravi Kumar Gaurav ने कहा कि पहले वह बेरोजगार थे और स्थायी काम नहीं मिल पा रहा था, लेकिन योजना में शामिल होने के बाद उन्होंने छोटे उत्पाद बनाकर अपना व्यवसाय शुरू किया है। बाजार में उत्पादों की बिक्री बढ़ने के साथ उनकी आय भी बढ़ रही है। वहीं Aditya Raj ने बताया कि योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें परीक्षा देकर प्रमाणपत्र मिला और लगभग 1 लाख रुपये का लोन भी स्वीकृत हुआ। उन्होंने Toolkit के लिए आवेदन किया है जो जल्द मिलने की उम्मीद है।
जानकारों के अनुसार PM Vishwakarma Yojana जैसे कार्यक्रम छोटे कारीगरों को Market से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। Trade Fair जैसे आयोजनों से कारीगरों को सीधे ग्राहकों से संपर्क करने का अवसर मिलता है और उनके उत्पादों की पहचान भी बढ़ती है। यदि इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते रहे तो बिहार के पारंपरिक उद्योगों को नया प्रोत्साहन मिल सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि PM Vishwakarma Yojana आने वाले समय में हजारों कारीगरों के लिए रोजगार और आय का स्थायी स्रोत बनेगी।











