
नई दिल्ली, 17 अगस्त। आरएसएस और जनसंघ से अपने किशोरावस्था में जुड़ाव, 90 के दशक में कोयंबटूर से दो बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले और जिन्हें उनके समर्थक ‘तमिलनाडु का मोदी’ कहते हैं महाराष्ट्र के राज्यपाल चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन भाजपा और एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं।
67 वर्षीय राधाकृष्णन ने 1998 में कोयंबटूर से अपना पहला लोकसभा चुनाव डेढ़ लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीता था। उनके पास राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का खजाना है जो उपराष्ट्रपति के रूप में उनकी भूमिका में काम आएगा। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं।
1999 में राधाकृष्णन लोकसभा के लिए फिर से चुने गए, लेकिन इसके बाद हुए तीन लगातार चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
कहा जाता है कि तमिलनाडु में सभी पार्टियों के लोग उनका सम्मान करते हैं। इसी वजह से भाजपा ने उन्हें झारखंड, तेलंगाना, महाराष्ट्र और पुडुचेरी में राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण पद दिए।
राधाकृष्णन की उम्मीदवारी विपक्ष के एक प्रमुख राजनीतिक नैरेटिव को भी निष्प्रभावी करती है, क्योंकि वे दक्षिण भारत से पहले ओबीसी नेता हैं जिन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित किया गया है।
एनडीए द्वारा प्रसारित एक आधिकारिक प्रोफाइल में राधाकृष्णन को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो प्रतिष्ठित, ज्ञानी और किसी कानूनी आरोप से मुक्त हैं।
राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर आरएसएस और जनसंघ जैसे संगठनों से जुड़ने के साथ शुरू हुआ। उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और तभी से राजनीति को जनसेवा का माध्यम बना लिया।
एनडीए के अनुसार, चुनावी, संगठनात्मक और संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का राधाकृष्णन का ट्रैक रिकॉर्ड दिखाता है कि वे भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में इतिहास रचने जा रहे हैं।
31 जुलाई 2024 को राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में शपथ ली। इससे पहले वे झारखंड के राज्यपाल के रूप में डेढ़ साल तक सेवाएं दे चुके हैं। झारखंड के राज्यपाल रहते हुए उन्हें तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
राज्यपाल का पद संभालने के बाद भी राधाकृष्णन अक्सर तमिलनाडु जाते रहते हैं। कुछ दिन पहले ही वे इस दक्षिणी राज्य में थे जहां उन्होंने कई कार्यक्रमों में भाग लिया और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से भी मुलाकात की। अगले साल तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने हैं।
20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में जन्में राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की है।
16 साल की उम्र में आरएसएस के स्वयंसेवक के रूप में शुरुआत करने वाले राधाकृष्णन 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य बने। 1996 में उन्हें तमिलनाडु भाजपा का सचिव नियुक्त किया गया। 1998 में पहली बार कोयंबटूर से लोकसभा के लिए चुने गए और 1999 में फिर से जीत हासिल की।
सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्टॉक मार्केट घोटाले की जांच कर रही समिति सहित विभिन्न संसदीय समितियों के अध्यक्ष और सदस्य के रूप में काम किया।
2004 से 2007 तक राधाकृष्णन तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहे। इस भूमिका में उन्होंने 93 दिनों तक चलने वाला 19,000 किलोमीटर का ‘रथ यात्रा’ निकाला। यह यात्रा भारत की सभी नदियों को जोड़ने, आतंकवाद को मिटाने, समान नागरिक संहिता लागू करने, अस्पृश्यता को दूर करने और नशीली दवाओं के खतरे से निपटने जैसे भाजपा और आरएसएस के प्रमुख मुद्दों को उजागर करने के लिए आयोजित की गई थी।
2020 से 2022 तक वे केरल के लिए भाजपा के अखिल भारतीय प्रभारी थे। 2004 में डीएमके द्वारा एनडीए से संबंध तोड़ने के बाद तमिलनाडु में भाजपा के लिए नए गठबंधन को आकार देने में उनकी अहम भूमिका रही।
एक उत्साही खिलाड़ी राधाकृष्णन कॉलेज स्तर पर टेबल टेनिस के चैंपियन रहे हैं और लंबी दूरी के धावक भी हैं। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल खेलना भी पसंद है।
पद से इस्तीफा दे चुके जगदीप धनखड़ की जगह होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होने हैं। नामांकन भरने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है।