
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 119 पैसे की तेज़ी के साथ 90.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के बाद आया है। विदेशी मुद्रा व्यापारियों का मानना है कि यह टैरिफ दर भारत की सापेक्ष स्थिति को मज़बूत करेगी।
फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, 18 प्रतिशत का यह नया टैरिफ दर पूरी कहानी बदल देता है। इससे भारत की तुलनात्मक स्थिति में सुधार होगा और एफआईआई की भागीदारी के लिए दरवाज़े फिर से खुलेंगे। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाज़ार में रुपया डॉलर के मुकाबले 90.30 पर खुला।
इससे पिछले बंद भाव 91.49 के मुकाबले 119 पैसे की बढ़त दर्ज की गई। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि रातोंरात आई यह ख़बर अमेरिका भारत व्यापार समझौते से जुड़ी है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लगभग नौ महीने की देरी के बाद इस समझौते की घोषणा की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी पुष्टि की। इसके तहत व्यापार टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिए गए हैं।
भंसाली ने कहा कि यह दर हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश और पाकिस्तान के मुकाबले थोड़ी कम है। इससे हमारे निर्यातकों को तुलनात्मक लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी नोट किया कि लंबे समय तक विक्रेता बने रहने के बाद एफआईआई अंततः भारतीय इक्विटी खरीद सकते हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि आरबीआई के रुख को लेकर आज और आने वाले दिनों में इंतज़ार करना होगा। उन्होंने बताया कि आरबीआई को शॉर्ट डॉलर पोजीशन खरीदने की ज़रूरत है। इस बीच डॉलर इंडेक्स में गिरावट देखी गई।
डॉलर इंडेक्स जो छह मुद्राओं के एक बास्केट के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापता है, 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 97.43 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ट्रेड में 0.41 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 66.03 डॉलर प्रति बैरल पर था।
घरेलू इक्विटी बाज़ार के मोर्चे पर 30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 2138.08 अंक यानी 2.62 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 83,804.54 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 607 अंक यानी 2.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,695.40 पर पहुंच गया।
एक्सचेंज डेटा के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 1,832.46 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची थी। यह बिकवाली लगातार जारी रही थी। अब नए व्यापार समझौते के बाद बाज़ार में उम्मीद की नई लहर दिख रही है।
टैरिफ में कमी से निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इससे व्यापार संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। रुपये की मज़बूती से आयात की लागत भी कम हो सकती है।
विदेशी निवेशकों का रुख बदलना बाज़ार के लिए एक अच्छा संकेत है। लंबे समय से बाहर खड़े रहने के बाद एफआईआई की वापसी से बाज़ार में तरलता बढ़ेगी। यह पूंजी बाज़ार के लिए एक स्वागत योग्य कदम साबित हो सकता है।
तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी ख़बर है। कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च में कमी से चालू खाता घाटे पर दबाव कम होगा। यह रुपये की मज़बूती को और बढ़ावा दे सकता है।
शेयर बाज़ार में दिख रही तेज़ी निवेशकों के विश्वास को दर्शाती है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दो प्रतिशत से अधिक की उछाल एक मज़बूत शुरुआत का संकेत दे रही है। बाज़ार अब आगे की दिशा को लेकर आशान्वित नज़र आ रहा है।
आने वाले दिनों में आरबीआई की कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी। केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप से बाज़ार में स्थिरता बनी रह सकती है। विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने के लिए भी यह ज़रूरी है।
वैश्विक बाज़ारों में डॉलर की कमजोरी भी रुपये के पक्ष में काम कर रही है। अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले अन्य मुद्राओं में मज़बूती देखी जा रही है। यह रुझान भारतीय रुपये को लाभ पहुंचा सकता है।
कुल मिलाकर यह व्यापार समझौता द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। आर्थिक सहयोग बढ़ने से दोनों देशों को फायदा होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह एक सकारात्मक विकास है।










