
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार के फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की रक्षा तैयारियों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। युवाओं के साथ बजट 2026 पर हुए संवाद में उन्होंने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि किसी भी वित्त मंत्री के लिए विरोधी मांगों का प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होती है। राष्ट्र की सुरक्षा और किसानों के कल्याण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
सीतारमण ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए पिछले एक दशक के रक्षा निवेश के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दिखाया कि पिछले दस साल में खर्च किए गए पैसे ने कैसे मदद की।
रक्षा मंत्री रहते हुए के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने एक समय का जिक्र किया जब सैनिकों के पास बुनियादी उपकरणों की कमी थी। उनके पास बुलेटप्रूफ जैकेट्स तक नहीं होते थे।
सीतारमण ने बताया कि सैनिकों के हाथ में बंदूक तो होती थी, लेकिन उसमें डालने के लिए गोली नहीं होती थी। यह स्थिति अब बदल चुकी है।
उन्होंने किसानों के हितों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि देश सुरक्षित रहे और साथ ही किसान पर्याप्त उत्पादन करें। उत्पादन के बाद उनकी फसल का उचित मूल्य भी मिलना चाहिए।
उपभोक्ताओं को यह मूल्य ज्यादा लग सकता है, इसलिए सरकार को सब्सिडी का प्रबंध भी करना पड़ता है। इन विरोधी मांगों का प्रबंधन ही वास्तविक चुनौती है।
अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए कर बढ़ाना हमेशा समाधान नहीं होता, यह बात उन्होंने स्पष्ट की। फिर भी देश की जरूरतों के लिए धन की आवश्यकता होती है।
कोविड-19 महामारी से उत्पन्न वित्तीय चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने इसे एक विशेष और अद्वितीय समस्या बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया था कि नागरिकों पर कर नहीं बढ़ाए जाएंगे।
वैक्सीन प्राप्त करने की जरूरत थी, चाहे वह भारत में बनी हो या आयात की गई हो। जान बचानी थी। हम नागरिकों से एक इंजेक्शन के पांच सौ रुपये नहीं मांग सकते थे।
संकट के दौरान तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को काफी उधार लेना पड़ा। यह एक कठिन निर्णय था, लेकिन आवश्यक था।
एक बार अर्थव्यवस्था में सुधार और विकास के संकेत स्पष्ट होने के बाद, फोकस कर्ज कम करने और वित्तीय संतुलन बहाल करने पर आ गया।
पिछले पांच-छह साल के दौरान कई बार बिना किसी डर या हिचकिचाहट के पैसा उधार लेना पड़ा। लेकिन जैसे ही हम इससे उबरे और विकास के स्पष्ट संकेत दिखे, हमने कर्ज चुकाने पर ध्यान दिया।
हमने जल्द से जल्द कर्ज की स्थिति से बाहर निकलने का प्रयास किया ताकि हमारे नागरिकों पर बोझ न पड़े। यह हमारी प्राथमिकता थी।
सीतारमण का संदेश स्पष्ट था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। साथ ही वित्तीय जिम्मेदारी और अन्य क्षेत्रों के विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
यह संतुलन ही एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला है।










