सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि वह अन्य राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा की गई मतदाता सूची के संशोधन में हस्तक्षेप नहीं करेगा। यह बयान बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के एक दिन बाद आया है।
चुनाव आयोग ने बिहार में विशेष गहन संशोधन अभ्यास के बाद मतदाता सूची को शुद्ध किया है। इसके बाद ही चुनाव की तारीखों की घोषणा की गई।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जॉयमल्या बागची की पीठ विशेष गहन संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। विपक्षी दल इस अभ्यास की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
पीठ ने स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों में चल रहे विशेष गहन संशोधन में वह हस्तक्षेप नहीं करेगी। कोर्ट ने कहा कि यह अभ्यास पूरी तरह से चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वह कोर्ट से सभी कार्यों को क्यों संभालने को कह रहा है। सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि भारत में अवैध रूप से रह रहे लोगों के बारे में पता चलने का डर हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से उन लोगों की सूची देने को कहा जो दावा करते हैं कि उन्हें हटाने के आदेश नहीं दिए गए। इस वजह से वे अपील दायर नहीं कर पा रहे हैं।
पीठ ने कहा कि कम से कम सौ ऐसे लोगों की सूची प्रस्तुत की जाए जिनकी यह शिकायत है। साथ ही यह बताया जाए कि वे अपील दायर करना चाहते हैं लेकिन उन्हें आदेश नहीं मिले।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि यह सब किसके लिए किया जा रहा है और लोग आगे क्यों नहीं आ रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी गई है।
शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि वह ड्राफ्ट रोल प्रकाशन के बाद 3.66 लाख हटाए गए और 21 लाख जोड़े गए मतदाताओं का डेटा तैयार करे।
30 सितंबर को चुनाव आयोग ने बिहार की अंतिम मतदाता सूची जारी की। आयोग ने बताया कि विशेष गहन संशोधन से पहले 7.89 करोड़ मतदाताओं की तुलना में अब यह संख्या घटकर 7.42 करोड़ रह गई है।
इस प्रकार कुल मतदाताओं की संख्या में लगभग 47 लाख की कमी आई है। हालांकि अगस्त में जारी ड्राफ्ट सूची की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 17.87 लाख की वृद्धि हुई है।
1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में 7.24 करोड़ मतदाता थे। मूल सूची से 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। इनमें मृत्यु, प्रवास और डुप्लीकेट मतदाता शामिल थे।
ड्राफ्ट सूची में 21.53 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है। साथ ही 3.66 लाख नाम हटाए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप कुल 17.87 लाख मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई है।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में सुधार के लिए यह विशेष अभ्यास किया है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज में हस्तक्षेप न करने का रुख अपनाया है। यह संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
मतदाता सूची का यह संशोधन चुनावी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
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