
पटना में रविवार को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सत्तारूढ़ एनडीए पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एनडीए ने लोकतंत्र को ‘धन तंत्र’ और ‘मशीन तंत्र’ में बदल दिया है।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी नहीं, बल्कि बिहार की जनता हारी है। उनका मानना है कि चुनाव में सिस्टम जीता और आम लोगों की हार हुई।
यूरोप दौरे से लौटने के बाद पटना पहुंचे तेजस्वी यादव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे अगले 100 दिनों तक सरकार के कामकाज पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
विपक्ष के नेता ने कहा कि वे इस अवधि में सरकार को उसके वादे पूरे करते हुए देखेंगे। नवंबर 2025 में हुए चुनाव में एनडीए ने आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन को बुरी तरह हराया था।
तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ‘साजिश’ रची गई थी। उनके अनुसार, चुनाव ‘धोखे से जीता गया’ था।
उन्होंने कहा, ‘हम सकारात्मक राजनीति करते हैं, इसलिए मैं 100 दिन तक मौजूदा सरकार के फैसलों और नीतियों पर कुछ नहीं कहूंगा।’ तेजस्वी यादव ने सरकार के चुनावी वादों की याद दिलाई।
उन्होंने कहा कि वे देखेंगे कि कब हमारी माताएं और बहनें ‘2 लाख’ प्राप्त करेंगी। उन्होंने युवाओं को एक करोड़ नौकरियों के वादे का भी जिक्र किया।
तेजस्वी यादव ने सरकार से पूछा कि कब तक हर जिले में चार से पांच कारखाने स्थापित होंगे। उन्होंने कहा कि वे इन वादों के पूरा होने का इंतजार करेंगे।
उनके अनुसार, सत्ताधारी दल ने लोकतंत्र को धन और मशीनों के शासन में बदल दिया है। यह बयान राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है।
तेजस्वी यादव का यह रुख विपक्ष की नई रणनीति का संकेत देता है। वे सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक समयसीमा तय कर रहे हैं।
बिहार की राजनीति में यह नया मोड़ महत्वपूर्ण हो सकता है। अगले 100 दिनों में सरकार के प्रदर्शन पर सभी की नजर रहेगी।
तेजस्वी यादव के इस कदम से राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। विश्लेषक इसे एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।
अब देखना यह है कि सरकार इन 100 दिनों में कैसा प्रदर्शन करती है। और तेजस्वी यादव इसके बाद किस तरह से सरकार को चुनौती देते हैं।
बिहार की जनता भी दोनों पक्षों के कदमों पर नजर रखे हुए है। आने वाले समय में राज्य की राजनीति और रोचक होने वाली है।










