
भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने बहुत अच्छा बताया है। उन्होंने कहा कि इस सौदे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि धारा 3 के तहत हीरे और कीमती पत्थरों पर अब शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। यह एक बहुत बड़ा कदम है।
गुप्ता ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह समझौता भारत के कटिंग और पॉलिशिंग उद्योग को बचाने में बहुत मदद करेगा। पहले दस में से नौ हीरे भारत में काटे जाते थे, लेकिन अमेरिकी टैरिफ के कारण सूरत के कारीगरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता बहुत व्यापक है और मेरा मानना है कि यह मेक इन इंडिया को बड़े फायदे पहुंचाएगा। विभिन्न उद्योगों में कौशल हस्तांतरण के साथ-साथ, भारत के हाल के व्यापार सौदों का बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि जब हम जेम्स और ज्वैलरी उद्योग में शून्य प्रतिशत ड्यूटी की बात करते हैं, तो यह अभी केवल हीरे और जेमस्टोन्स पर लागू होती है।
ज्वैलरी स्वयं एक बहुत बड़ा सेगमेंट है, जिसे अभी तक शून्य प्रतिशत ड्यूटी ब्रैकेट में शामिल नहीं किया गया है। गुप्ता ने सरकार से अपील की कि भविष्य की वार्ताओं के दौरान ज्वैलरी को भी धारा 3 के तहत शामिल किया जाए।
अगर ज्वैलरी को इस ढांचे के तहत लाया जाता है, तो इससे बहुत बड़े फायदे होंगे। यह उद्योग के विकास के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकता है।
गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे भारत में मैन्युफैक्चरिंग हब विकसित हो रहे हैं, इसका सकारात्मक प्रभाव पहले से ही देखा जा सकता है।
पहले, जब भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग शुरू हुई, तो हमारा देश शुद्ध आयातक था लेकिन आज वह निर्यातक बन गया है। यही पैटर्न ऑटोमोबाइल उद्योग में देखा जा रहा है और अब जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर में भी दिख रहा है।
उद्योग के विशेषज्ञ मानते हैं कि नीतिगत सहायता से यह क्षेत्र और तेजी से आगे बढ़ेगा। विनिर्माण क्षमता में वृद्धि से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
वर्तमान में, सरकार ने एक बहुत बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य है 2047 से पहले भारत को एक पूर्ण निर्यातक देश बनाना और इसे ज्वैलरी के लिए एक वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करना।
गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह दृष्टि, मेरा मानना है कि 2047 तक हासिल कर ली जाएगी। यह लक्ष्य उद्योग के लिए एक प्रेरणा का काम कर रहा है।
अमेरिका के साथ यह समझौता न केवल टैरिफ बाधाओं को दूर करता है, बल्कि भारतीय कारीगरों के लिए नए बाजार भी खोलता है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस पूरे विकास से उद्योग में निवेश बढ़ने की संभावना है। नई technology और प्रशिक्षण से कारीगरों के कौशल में और निखार आएगा।
सूरत और अन्य क्लस्टरों में काम कर रहे लाखों कारीगरों के लिए यह समझौता एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह उनकी आजीविका को सुरक्षित करने और उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।
भारत की जेम और ज्वैलरी उद्योग की कहानी अब एक नए मोड़ पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की पहचान और मजबूत होगी।










