
बेंगलुरु स्थित उद्योगपति और कॉन्फिडेंट ग्रुप के संस्थापक सी.जे. रॉय की आत्महत्या को इनकम टैक्स विभाग के दबाव से जोड़ने के परिवार के आरोपों पर कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वरा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मौत को आईटी दबाव से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी।
गृहमंत्री ने मंगलवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा।
परमेश्वरा ने कहा, तब तक हम कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते। इस स्टेज पर यह नहीं कहा जा सकता कि आत्महत्या किसी खास वजह से हुई।
केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सी.जे. रॉय की आत्महता के संबंध में एक पत्र लिखा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए परमेश्वरा ने कहा कि आईटी विभाग केंद्रीय वित्त मंत्री के अधीन आता है।
उन्होंने कहा कि जांच के आदेश देने के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए। गृहमंत्री ने कहा कि उन्हें इस पत्र के बारे में पता है लेकिन वे उसकी सामग्री से अनजान हैं।
परमेश्वरा ने यह भी कहा कि राज्य स्तर पर एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित की गई है। यह दल पहले ही अपनी जांच शुरू कर चुका है।
उन्होंने कहा कि जांच के नतीजे के आधार पर ही आगे का फैसला लिया जाएगा। गृहमंत्री ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आत्महत्या के पीछे के कारण सामने आ जाएंगे।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और परिवार के सदस्यों तथा अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज करेगी। इन बयानों से सामने आने वाले सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।
हालांकि पुलिस सूत्रों ने बताया कि सी.जे. रॉय पिछले छह महीनों से गंभीर वित्तीय संकट में थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार रॉय ने अपने business ventures के लिए कोई बैंक लोन नहीं लिया था।
उनके operations कर्नाटक और केरल के साथ साथ विदेशों तक फैले हुए थे। लेकिन नई परियोजनाओं के लिए बैंक funding के बजाय सीधे कुछ राजनेताओं से निवेश आया था।
जांच एजेंसियों को शक है कि इस पैसे का बड़ा हिस्सा अकाउंटेड नहीं था यानी black money रहा होगा। पुलिस सूत्रों ने आगे बताया कि रॉय द्वारा शुरू की गई नई परियोजनाओं को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
साथ ही उनकी आय का एक बड़ा हिस्सा शानोशौकत भरी lifestyle पर खर्च हो रहा था। नतीजतन वे अपने वित्त का प्रबंधन करने में पूरी तरह विफल रहे थे।
जैसे जैसे परियोजनाएं नुकसान देने लगीं कुछ राजनेताओं ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए। इसी बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों ने रॉय के business activities की छानबीन शुरू कर दी थी।
जांच का प्राथमिक फोकस बैंक लोन के अभाव में इतने बड़े पैमाने के business के लिए funds का स्रोत क्या था यही था। अब यह शक जताया जा रहा है कि एक तरफ investors के दबाव और दूसरी तरफ इनकम टैक्स विभाग व अन्य एजेंसियों की पूछताछ के बीच फंसे रॉय संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे थे।
इससे वे गंभीर मानसिक तनाव में आ गए। पूरी तरह वित्तीय पतन झेल चुके रॉय मानसिक रूप से भी टूट चुके थे। वे पिछले कुछ महीनों से acute stress और depression से जूझ रहे थे।
जांच के दौरान उनके business dealings के सभी पहलू उजागर हो जाएंगे इस डर ने भी उन्हें सताना शुरू कर दिया था। पुलिस सूत्रों को शक है कि यही सभी दबाव उन्हें जीवन समाप्त करने के चरम कदम तक ले गए होंगे।
सी.जे. रॉय ने पिछले शुक्रवार को बेंगलुरु में अपने ऑफिस में एक आईटी छापे के दौरान खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने अपने पहली मंजिल के ऑफिस चेंबर में सीने में गोली मारी थी।
जांच से पता चला कि उस समय वे अपने चेंबर में अकेले थे। गोली की आवाज सुनकर आईटी अधिकारी चेंबर में दौड़े और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने आगे बताया कि आईटी छापे के दौरान करीब एक घंटे की पूछताछ के बाद रॉय से कुछ दस्तावेज जमा करने को कहा गया था।
रिकॉर्ड्स का एक सेट देने के बाद आईटी अधिकारियों ने अतिरिक्त दस्तावेज मांगे। इसके बाद रॉय अपने चेंबर में गए और कथित तौर पर खुद को गोली मार ली।












