Iris dena
4 मार्च 2026 को हिंद महासागर में बड़ा सैन्य तनाव सामने आया जब ईरान की नौसेना का युद्धपोत IRIS Dena अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले के बाद डूब गया। यह घटना श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 नौटिकल मील दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत की पुष्टि हुई जबकि 32 लोगों को बचा लिया गया। कई अन्य नाविकों के लापता होने की खबर है। ईरान ने आरोप लगाया कि iris-dena पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया और इसे समुद्र में बड़ा अपराध बताया गया।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि IRIS Dena हाल ही में भारतीय नौसेना के कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहा था। यह युद्धपोत फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास Milan में भाग लेने आया था। उस समय iris-dena भारतीय नौसेना का मेहमान था और इसमें लगभग 130 से 180 नौसैनिक सवार थे। ईरान का कहना है कि जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से अपने देश लौट रहा था जब अमेरिकी पनडुब्बी ने अचानक टॉरपीडो दाग दिया।
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने Mark 48 torpedo का इस्तेमाल किया, जो आधुनिक और अत्यधिक शक्तिशाली हथियार माना जाता है। यह टॉरपीडो जहाज के नीचे विस्फोट करता है और पानी में एक विशाल दबाव तरंग पैदा करता है जिससे जहाज का ढांचा टूट जाता है। बताया गया कि iris-dena पर टॉरपीडो लगते ही जहाज के पिछले हिस्से में बड़ा विस्फोट हुआ और कुछ ही समय में पूरा युद्धपोत समुद्र में समा गया। श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और घायल नाविकों को गाले के अस्पताल में पहुंचाया गया।
ईरान ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को इस कदम के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि IRIS Dena पर हमला उस समय हुआ जब जहाज ईरान से लगभग 2000 मील दूर था और किसी भी युद्ध क्षेत्र के करीब नहीं था। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन बताया और कहा कि iris-dena पर हमला क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल सकता है। इस घटना के बाद मध्य पूर्व और हिंद महासागर क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है।
डूबा हुआ IRIS Dena ईरान की Moudge-class फ्रिगेट थी जिसे 2021 में सेवा में शामिल किया गया था। लगभग 95 मीटर लंबा यह युद्धपोत आधुनिक रडार सिस्टम, मिसाइल, एंटी-एयरक्राफ्ट गन और टॉरपीडो से लैस था। इसकी अधिकतम गति लगभग 30 नॉट बताई जाती है और यह हेलीकॉप्टर संचालन की क्षमता भी रखता था। iris-dena ईरानी नौसेना के आधुनिक युद्धपोतों में गिना जाता था और क्षेत्रीय समुद्री शक्ति के रूप में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा और सैन्य टकराव को लेकर चिंता बढ़ गई है। हिंद महासागर में हुई इस घटना ने वैश्विक कूटनीति को भी प्रभावित किया है क्योंकि IRIS Dena हाल ही में भारत के नौसैनिक कार्यक्रम में शामिल हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि iris-dena पर हमला क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को बदल सकता है और आने वाले दिनों में सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक बयानबाजी में तेजी देखी जा सकती है।











