
नई दिल्ली में 16 अप्रैल से शुरू हुए विशेष सत्र में महिला आरक्षण Bill को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। लोकसभा में इस मुद्दे पर कुल 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे चर्चा तय की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लोकसभा में Nari Shakti Vandan Adhiniyam पर विस्तार से संबोधन देंगे। इस बीच सरकार ने साफ संकेत दिया है कि 2029 Election तक इस कानून को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे women-reservation-bill को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
दरअसल यह पूरा सत्र महिला आरक्षण को लेकर केंद्रित है, जिसमें 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की योजना पर चर्चा हो रही है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि इस आरक्षण को delimitation प्रक्रिया से अलग किया जाए। वहीं सरकार का कहना है कि गलत आंकड़ों के जरिए भ्रम फैलाया जा रहा है। women-reservation-bill को लेकर यह टकराव अब संसद के भीतर खुलकर दिखाई दे रहा है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ सामने आ रहे हैं।
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों को गलत delimitation डेटा दिखाकर गुमराह किया जा रहा है। उनके अनुसार women-reservation-bill को राजनीति से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि delimitation आयोग सभी राजनीतिक दलों से चर्चा करेगा और उसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा सीटों की संभावित संख्या 850 अधिकतम सीमा है, कोई निश्चित आंकड़ा नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने भाषण में कहा था कि चार दशक के इंतजार के बाद यह कानून पास हुआ है और अब इसे लागू करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि 2029 Election इस नए आरक्षण ढांचे के तहत होना चाहिए, जो देश की भावना को दर्शाता है। ऐसे में women-reservation-bill सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि आने वाले चुनावी परिदृश्य को भी बदलने वाला कदम माना जा रहा है। इससे राजनीतिक दलों की रणनीति और उम्मीदवार चयन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
वहीं पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर अलग ही राजनीतिक गर्मी देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने delimitation को लेकर चिंता जताई है कि इससे राज्य में असंतुलन पैदा हो सकता है। इसके जवाब में सीतारमण ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या महिलाएं और इंतजार करें, यह साफ किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि डर का माहौल बनाकर women-reservation-bill को रोकने की कोशिश की जा रही है, जो सही नहीं है।
अब सवाल यह है कि क्या सभी दल इस मुद्दे पर एकमत हो पाएंगे या फिर यह बहस लंबी खिंचेगी। सरकार का दावा है कि सभी पार्टियां महिला सशक्तिकरण के पक्ष में हैं, लेकिन ground पर स्थिति थोड़ी अलग दिख रही है। ऐसे में आने वाले दो दिन की संसदीय चर्चा बेहद अहम मानी जा रही है, जहां women-reservation-bill के भविष्य की दिशा तय होगी और देश की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ सकता है।












