vikramshila-setu
बिहार के भागलपुर में 4 मई 2026 की रात करीब 12:50 AM पर बड़ा हादसा सामने आया, जब Vikramshila Setu का करीब 25 से 33 मीटर लंबा हिस्सा अचानक गंगा नदी में गिर गया। यह घटना पिलर नंबर 133 के पास हुई, जहां पहले हल्का धंसाव देखा गया और कुछ ही मिनटों में पूरा स्लैब नदी में समा गया। प्रशासन के अनुसार, समय रहते ट्रैफिक रोक दिए जाने से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा झटका साबित हुई है। Vikramshila Setu इस इलाके की लाइफलाइन माना जाता है, जिससे हजारों वाहन रोज गुजरते हैं।
दरअसल, घटना की शुरुआत देर रात लगभग 12:35 बजे हुई, जब पुल के एक हिस्से में गैप बनने की सूचना मिली। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत अलर्ट जारी किया और पुल पर चल रहे वाहनों को हटाया गया। इसके करीब 15 मिनट बाद यानी 12:50 AM पर स्लैब पूरी तरह टूटकर गंगा में गिर गया। प्रशासन ने तुरंत दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी और Vikramshila Setu को पूरी तरह बंद कर दिया। इस तेजी से की गई कार्रवाई के कारण बड़ा हादसा टल गया।
तकनीकी स्तर पर देखें तो शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि पिलर के पास जॉइंट में गैप बढ़ने के कारण यह घटना हुई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिला है कि लंबे समय से पुल के कुछ हिस्सों में मरम्मत की जरूरत थी। अब एक एक्सपर्ट इंजीनियरिंग कमेटी बनाई गई है, जो Vikramshila Setu की पूरी स्ट्रक्चर की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि बिना विस्तृत निरीक्षण के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है।
इस हादसे का सीधा असर क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर पड़ा है। Vikramshila Setu के बंद होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच सीधा संपर्क टूट गया है। अब लोगों को मुंगेर के रास्ते करीब 100 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। इससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा है। स्थानीय लोगों के लिए यह पुल केवल एक सड़क नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा था। ऐसे में अचानक बंद होने से भारी परेशानी खड़ी हो गई है।
इसी बीच प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था शुरू कर दी है और गंगा घाटों पर नाव और छोटे जहाजों के संचालन पर भी विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का अनुमान है कि मरम्मत कार्य में 15 से 20 दिन का समय लग सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के बाद ही लिया जाएगा। Vikramshila Setu की स्थिति को देखते हुए अब पूरे बिहार में अन्य पुलों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
वहीं, यह घटना केवल एक पुल गिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर मेंटेनेंस पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ महीनों में इस पुल की हालत को लेकर चेतावनियां भी सामने आई थीं, लेकिन समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब सवाल यह है कि क्या जांच के बाद जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकेगा या नहीं। फिलहाल, Vikramshila Setu हादसा बिहार में सार्वजनिक निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर बड़ी बहस छेड़ चुका है।












